लधियाघाटी क्षेत्र में खेतों पर पलटी धान की खड़ी फसल को किसानों ने काटना शुरू कर दिया है। चौड़ापिता, गागरी, मंगललेख, कुल्याल गांव में किसानों ने लगभग आधी धान की पलटी फसल को काट लिया है। यहां सर्वाधिक धान के उत्पादक चिम्योली गांव के है।
राजेंद्र सिंह, लक्ष्मण सिंह, त्रिलोक सिंह, प्रकाश मेहता आदि कई ऐसे किसान हैं, जो 70 से 80 क्विंटल तक धान की पैदावार कर उसकी बिक्री करते आ रहे है। उनका कहना है कि यदि पलटे धान के खेतों की कटाई नहीं की गई तो इसका पराल भी जानवरों के काम नहीं आएगा और दूसरी फसल लेने में भी दिक्कतें होगी। धान की खेती तो पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
उधर, धान की खेती को हुए नुकसान की डिटेल सर्वे के लिए ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों को सक्रिय कर दिया गया है। जिला कृषि अधिकारी हरवंश सिंह ने देहरादून से फोन पर बताया कि एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी (एसीआई) के अधिकारियों को घाटी क्षेत्र में हुए फसलों के नुकसान की जानकारी दी गई है। राजस्व और कृषि विभाग की ओर से अलग से सर्वे किया जाएगा।