नोटबंदी ने काले धन पर कितना अंकुश लगाया है, इसका आंकड़ा तो अभी सार्वजनिक नहीं हो सका है, मगर इससे ऋण-जमा अनुपात (सीडीआर) जरूर बिगड़ा है। चंपावत जिले में एक साल में सीडीआर 5.56 प्रतिशत कम हो गया है। यह अनुपात बीते चार वर्ष के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है।
जिले में 17 बैंकों की कुल मिलाकर 58 शाखाएं हैं। इन शाखाओं में 31 मार्च 2017 तक 1818.14 करोड़ रुपये की जमा राशि थी। जबकि बीते एक वर्ष में ऋण के रूप में महज 429.98 करोड़ रुपये ही दिए जा सके हैं। जिले में सीडीआर महज 23.65 प्रतिशत रहा। जबकि एक साल पूर्व मार्च 2016 तक बैंकों के पास जमा पूंजी 1312.43 करोड़ थी। और उसने 383.31 करोड़ रुपये का ऋण दिया। इस साल का सीडीआर 29.21 प्रतिशत था। मतलब यह कि इस एक साल में ऋण जमा अनुपात में 5.56 प्रतिशत की गिरावट आ गई। पिछले वित्त वर्ष में बैंकों में जमा राशि में 505.7 करोड़ की बढ़ोत्तरी हुई, लेकिन कर्ज राशि में महज 46.67 करोड़ रुपये की ही वृद्धि हो सकी।
लीड बैंक ने सीडीआर के बेहद खराब होने के लिए जो कारण गिनाए हैं, उसमें नोटबंदी को भी शामिल किया गया है। लीड बैंक प्रबंधक आनंद सिंह रावत का कहना है कि नवंबर से दिसंबर तक विमुद्रीकरण -नोटबंदी के चलते बैंकों में 141 करोड़ रुपये की राशि जमा हुई। वहीं विमुद्रीकरण की अवधि में बैंक कर्मियों की अति व्यस्तता से ऋण वितरण प्रणाली पर सीधा असर पड़ा है। इसके अलावा टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग निर्माण के लिए बैंक में जमा 200 करोड़ रुपये से भी ऋण-जमा अनुपात का संतुलन बिगड़ा है।
वैसे चंपावत जिले में औद्योगिक पिछड़ापन, आधारभूत ढांचे की कमी, पहाड़ में कच्चे माल का न होने के अलावा छितरी हुई खेती व सिंचाई सुविधाएं भी नाकाफी है। जिस कारण न उद्यमी और न ही किसान वर्ग कर्ज लेने को आगे आता है।
वर्ष जमा राशि (करोड़ में) कर्ज राशि सीडी अनुपात (प्रतिशत में)
2013-14 992.02 286.14 28.84
2014-15 1140.1 329.1 28.86
2015-16 1312.43 383.31 29.21
2016-17 1818.14 429.98 23.65
सीडीआर को बढ़ाएगी उप समिति
भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के मुताबिक सीडीआर की आदर्श स्थिति 40 प्रतिशत है। अधिक सीडीआर से बैंकों का मुनाफा भी बढ़ता है। चंपावत जिले की सीडीआर बेहद कम होने से विशेष उप समिति बनाई गई है। इस समिति को सीडीआर बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।
कैनरा बैंक सबसे आगे, पीएनबी फिसड्डी
चंपावत जिले में ऋण-जमा अनुपात (सीडीआर) में कैनरा बैंक सबसे आगे रहा। बीते वित्त वर्ष में उसका सीडीआर 113.68 प्रतिशत रहा। यानि 2016-17 में उसके पास कुल जमा 2.28 करोड़ हुआ, मगर उसने कर्ज 2.59 करोड़ रुपये का दिया। बैंक के पास 34 लाख रुपये 2015-16 के अवशेष थे। दूसरी तरफ पंजाब नेशनल बैंक सीडीआर में सबसे पीछे है। उसका ऋण-जमा अनुपात महज 16.03 प्रतिशत है। जो जिले के 23.65 प्रतिशत के औसत से काफी कम है।