चंपावत। नेपाल सीमा से लगे चंपावत जिले में बैंक शाखाओं की भरमार के बावजूद अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र के लोग बैंक की सुविधा से दूर हैं। इन ग्रामीण इलाकों में न बैंक की शाखाएं हैं और न ही व्यावसायिक प्रतिनिधि (बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट)। नतीजा यह कि ढेरों गांवों में लोगों को बैंक के काम के लिए दो-दो दिन लग जाते हैं।
डिजिटल इंडिया से लेकर डिजिटल बैंकिंग के शोर के बीच इस जिले में अभी परंपरागत बैंकिंग प्रणाली भी कई जगह पटरी पर नहीं है। जिले में 20 बैंक की कुल 65 शाखाएं हैं। इस साल जून तक साढ़े चार लाख खाताधारकों की कुल जमा पूंजी 2810 करोड़ रुपये है। जिले का 83 फीसदी भू भाग ग्रामीण होने के बावजूद यहां सिर्फ 12 शाखाएं हैं। पांच किमी के दायरे में बैंकिंग सुविधा नहीं होने पर व्यावसायिक प्रतिनिधि के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों तक लाभ देने की कवायद भी अधूरी है। जिले में व्यावसायिक प्रतिनिधि के 108 पद हैं लेकिन इनमें से तैनात 84 ही हैं। इनमें से भी पांच निष्क्रिय हैं। इससे दूरदराज के लोगों बैंकिंग असुविधा हो रही है। जन धन खातों से लेकर पेंशन, छात्रवृत्ति या समाज कल्याण की योजनाओं के लिए पापड़ बेलने पड़ते हैं।
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बैंक के काम से दूसरे दिन होती है घर वापसी
चंपावत। डांडा, ककनई के ग्रामीणों को बैंक के काम के लिए पैदल दूरी लांघने के बाद 76 किमी दूर टनकपुर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके लिए यहां के लोगों की बैंक का काम निपटाने के एक दिन बाद घर वापसी हो पाती है। ग्रामीणों को छोटे काम के लिए एक हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे ही हाल नेपाल सीमा से लगा पंचेश्वर क्षेत्र के भी हैं। पंचेश्वर से 32 किमी दूर किमतोली से बैंक का काम निपटाने में पूरा दिन लगता है। पंचेश्वर, रौसाल, तामली, चूका, नीड़, डांडा ककनई, सूखीढांग सहित 75 गांवों पर सर्वाधिक मार पड़ रही है।
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पांच किमी की हवाई दूरी के अंतर्गत गांवों में बैंकिंग सुविधा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए बैंक विहीन क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रतिनिधि की तैनाती तीन माह के भीतर कर ली जाएगी। अभी चंपावत जिले में 108 में से 24 व्यावसायिक प्रतिनिधि नहीं हैं। - एएस ग्वाल, लीड बैंक प्रबंधक, चंपावत।