दशहरा बीत गया और दिवाली करीब है, लेकिन राशन की दुकानों से खाद्य सामग्री अब तक नहीं बंट सकी है। ये हाल इस जिले सहित प्रदेशभर के सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं के हड़ताल पर जाने से हुआ है। चंपावत जिले में करीब 55 हजार उपभोक्ताओं को राशन नहीं मिल सका है।
राष्ट्रीय खाद्यान्न योजना के तहत सस्ता गल्ला विक्रेताओं को लाभांश 143 रुपये की दर से दिया जा रहा है। सस्ता गल्ला विक्रेता संघ राज्य खाद्य योजना के तहत भी इसी लाभांश की मांग कर रहा है। इस वक्त राज्य योजना का लाभांश महज 18 रुपये हैं। इसके अलावा संघ गल्ले की दुकान का किराया, तौल के राशन देने सहित कई मांगें उठाई हैं।
चंपावत जिले में 33,595 राष्ट्रीय खाद्यान्न योजना के अलावा 22,100 राशनकार्ड धारक हैं। इन कार्डधारकों को अक्तूबर में 24 दिन बीतने पर भी राशन नहीं मिला है। गल्ला विक्रेताओं ने खाद्यान्न गोदाम से राशन नहीं उठाया है। गतिरोध नहीं टूटने पर दिवाली पर्व से ठीक पहले लोगों को गेहूं, चावल, चीनी नहीं मिल पा रही है और लोग इसे ऊंचे दाम पर खरीदने को मजबूर हैं।
राज्य खाद्य योजना में लाभांश प्रति क्विंटल 143 रुपये दिसंबर से दिए जाने पर शासन सहमत हैं, लेकिन इस आश्वासन को लिखित रूप से दिया जाए। तभी सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता राशन उठाएंगे। -हीरा बल्लभ जोशी, जिलाध्यक्ष, सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता संघ।
सस्ता गल्ला विक्रेता संघ को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। सोमवार तक कोटेदारों द्वारा राशन नहीं उठाने पर वैकल्पिक प्रबंध किया जाएगा। -एसएल आर्य, जिला पूर्ति अधिकारी।