सेना भर्ती को आए बेरोजगार युवकों को कमाई का जरिया बनाने वाले बाज नहीं आ रहे हैं। वह युवकों को महंगे में सामान बेचकर खूब वारे-न्यारे करने में लगे हैं। वहीं साफ-सफाई का अभाव और मानकों को ताक पर रखकर खाने-पीने की वस्तुएं बेचने से बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है।
बनबसा में सेना भर्ती के चलते सेना छावनी के पास जंगल में अस्थायी बाजार खुल गया है। यहां दुकान लगाए दुकानदार युवकों को महंगे दामों पर सामान बेच रहे हैं। जरूरत की वस्तुओं की कीमत में खासा इजाफा किया गया है। साथ ही साफ-सफाई के अभाव में संक्रमण का खतरा भी मंडरा रहा है।
सार्वजनिक स्थलों पर गुटखा जैसे मादक पदार्थों की भी बिक्री खुलेआम चल रही है। ठेलों और खोमचों में बिना जाली लगाए चाट, टिक्की, समोसा, बरगर, गोलगप्पे (पानी पूरी), चाऊमिन और भोजन की व्यवस्था की जा रही है। पेयजल के स्वच्छता की गारंटी नहीं। मिनरल वाटर हैैं भी तो घटिया ब्रांड।
प्रशासन की हिदायत के बाद भी किसी ने इन अस्थायी दुकानों में रेट लिस्ट चस्पा नहीं की है। तहसीलदार ने बताया कि जांच कर युवकों की शिकायत पर पुलिस को कानूनी कार्रवाई के लिए कहा जाएगा। वहीं, मौका देख वाहन स्वामी भी अधिक पैसे लेने से बाज नहीं आ रहे हैं। कान सफाई वाले भी यहां-वहां से आकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। रैन बसेरों पर भी किराया मौका देखकर बढ़ाया गया है।
भर्ती स्थल पर बेचे जा रहे सामान की कीमत
उबला अंडा - पांच रुपए
एक केला - पांच रुपए
चाय - दस से पंद्रह रुपए
खाने की थाली - पचास रुपए प्लेट (भरपेट नहीं)
मिनरल वाटर - बीस से तीस रुपए
सेना में भर्ती होना कहीं जज्बा तो कहीं बेरोजगारी
कुछ युुवकों का सेना में भर्ती होना पारिवारिक पृष्ठ भूमि है तो कुछ युवकों में स्वयं का जज्बा भी सेना की ओर खींचता है। कुछ पढ़े-लिखे युवक तो बेरोजगारी से परेशान होकर सेना में भर्ती होने को विवश हैं। अपनी योग्यता छिपाकर कुछ युवक सेना भर्ती को आए हैं। पिथौरागढ़ से आए संदीप रावत इंटरमीडिएट हैं। सेना में भर्ती होना उसकी पृष्ठभूमि है। उसके पिता सेना की 9 कुमाऊं से रिटायर्ड हैं। वहीं पिथौरागढ़ के ही इंटर पास युवक रमेश सिंह के पिता असम राइफल्स से अवकाश प्राप्त हैं। उक्त दोनों युवकों के परिवार की पृष्ठभूमि फोर्स की है। वहीं दो अन्य युवकों ने अपने नाम और फोटो प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि वे बीएससी और बीएड हैं, लेकिन निर्धनता के चलते न आगे पढ़ पा रहे हैं, नहीं कोई कोर्स ही कर पा रहे हैं। लिहाजा उन्होंने सेना ज्वाइन कर देश सेवा और परिवार के पालन-पोषण का मन बनाया है।