उत्तराखंड पेयजल निगम, जल संस्थान का एकीकरण और राजकीयकरण की मांग को लेकर पेयजल निगम कर्मचारी-अधिकारी अब आरपार की जंग के मूड में है। अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समन्वय समिति के नेतृत्व में मंगलवार को पेयजल निगम कर्मी सामूहिक अवकाश पर रहे। कोई भी कामकाज नहीं हुआ। दफ्तरों पर ताले लटके रहे। प्रदर्शन के बाद गेट मीटिंग कर समिति ने निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया। 29 अक्तूबर को पेयजल निगम के प्रदेशभर के कर्मी-अधिकारी परेड ग्राउंड से सचिवालय तक रैली निकालेंगे।
संघर्ष समिति के समन्वयक अशोक स्वरूप की अध्यक्षता और बीसी जोशी के संचालन में हुई सभा में कर्मियों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। संगठन ने हिमाचल एवं जम्मू कश्मीर में पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग की तर्ज पर यहां भी पेयजल निगम कर्मियों का ढांचा बनाने और काम के बेहतर अवसर देने की मांग की। सभा और प्रदर्शन में ललित गौड़, कवींद्र बिष्ट, हरीश पांडेय, भास्कर राम, जगदीश जोशी, जसपाल बोहरा, लक्ष्मी दत्त नरियाल, भागीरथी जोशी, रूकमणि जोशी, बिजेंद्र सियाल, ज्योति रावत, अनिल कुमार, प्रेम प्रकाश पंत, बृजेश वल्दिया आदि थे।
इस्टीमेट पेयजल निगम ने बनाए, काम दूसरी एजेंसी करा रही
पेयजल निगम की निर्माणदाई संस्था सीएनडीएस से इस्टीमेट बनाने के बाद काम छीन रहे हैं। संघर्ष समिति का कहना है कि ज्यादातर काम उप्र की निर्माणदाई संस्था को दिए गए हैं। इस वक्त चंपावत जिले में लोहाघाट स्टेडियम, टनकपुर राजकीय पॉलीटेक्निक, चंपावत एएनएम-जेएनएम के निर्माण कार्य सहित आधा दर्जन से ज्यादा काम दूसरी एजेंसी को दिए जा चुके हैं, जबकि इन सभी के इस्टीमेट आदि बनाने की जिम्मेदारी सीएनडीएस को दी गई थी।