2 अक्तूबर 2014 से शुरू स्वच्छता अभियान को एक साल पूरा हो गया है। सफाई को लेकर अफसरों से जन प्रतिनिधियों तक ने हाथों में झाड़ू थामे थे, लेकिन कुछ वक्त बाद झाड़ू थामे हाथ तो कम हो गए। साथ ही शहर गंदगी के ढेर में तब्दील हो गया।
नगर पंचायत से अपग्रेड होकर 2013 में नगर पालिका बने इस शहर में सफाई का आलम नाक नीची करने वाला है। न पर्याप्त कूड़ेदान हैं और नहीं सफाई का कोई ठीक हाल। शनिवार को भी कई स्थानों पर गंदगी के ढेर थे। गोरलदेव मंदिर को जाने वाले रास्ते, एपैक्स एकेडमी सहित कई स्थानों पर कूड़े के ढेर हैं। इन स्थानों पर लोगों के लिए आवाजाही चुनौती बनी हुई है। पालिका का कहना है कि सफाई कर्मियों की कमी की वजह से शहर को साफ करना कठिन हो रहा है। फिर भी पालिका अपने स्तर से पूरे प्रयास कर रहा है।
सभासद गिरीश पांडेय का कहना है कि पालिका से इन स्थानों पर सफाई की मांग की गई है। एपैक्स एकेडमी वाले स्थान पर कूड़ादान प्रस्तावित भी किया गया है। कुछ लोगों की आपत्ति की वजह से इसमें देरी हो रही है। जल्द से जल्द कूड़ादान बनवाकर गंदगी से निजात दिलवाई जाएगी।
तो ऐसे चलेगा स्वच्छ भारत अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एक साल पूर्व शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान के संचालन के लिए नवरत्न कंपनियों में चुनी गई नेशनल हाइड्रो पावर कारपोरेशन (एनएचपीसी) ही पलीता लगा रही है। एनएचपीसी को चंपावत और पिथौरागढ़ जिले में पांच सौ से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालयों का निर्माण करना है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर शौचालय निर्माण का कार्य आधा अधूरा छोड़ दिया गया है। प्राथमिक विद्यालय सल्ली में शौचालय निर्माण कार्य बीच में ही छोड़ देने से छात्र-छात्राओं को दिक्कतें हो रही है।
सल्ली के प्रधान पूरन सिंह रावत ने बताया कि एनएपीसी के अनुरोध पर उन्होंने प्राथमिक विद्यालय के पुराने शौचालय की जगह जमीन उपलब्ध कराई। जिसमें एनएचपीसी की ओर से गड्ढा बनाकर छोड़ दिया गया है। शौचालय के लिए तीन चार छोटे छोटे कमरे बनाए हैं तथा पानी के लिए टंकी रखी गई है, लेकिन पानी की टंकी में कनेक्शन नहीं है। कमरों के ऊपर टिन की चादरों को रोकने की आधी-अधूरी व्यवस्था की गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें एनएचपीसी का मानकों की जानकारी नहीं है। इस संबंध में प्रधान ओर से एनएचपीसी के अधिकारियों को सूचित करने के बाद उनकी ओर से लिखित में शिकायत किए जाने को कहा। ग्राम प्रधान का कहना है कि एनएचपीसी को लिखित में सूचित करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। संबंधित ठेकेदार का मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है।