चंपावत। एकीकृत उत्तर प्रदेश में 15 सितंबर 1997 को अस्तित्व में आया चंपावत जिला 24 वर्ष पूरे करके मंगलवार की सुबह 25वें वर्ष में प्रवेश कर जाएगा। युवा जिला है लिहाजा इसके समक्ष चुनौतियां के साथ उम्मीदों का पहाड़ भी है। चुनौतियों की बात की जाए तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी चिकित्सा, शिक्षा, पेयजल, बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी तक नहीं पहुंची हैं। बावजूद इसके जिले ने कई नई ऊंचाइयों को भी प्राप्त किया है। वर्तमान में जिले में पांच तहसीलों के साथ ही चार विकासखंड और 313 ग्राम पंचायतें हैं। शुरूआत में जिले का विकास नियोजित व पारदर्शी तरीके से हुआ तो इसका श्रेय पहले डीएम नवीन शर्मा को जाता है। बाद के डीएम तारकेंद्र वैष्णव, गोपाल कृष्ण द्विवेदी, अवनेंद्र नयाल, श्रीधर बाबू अद्दांकी, डॉ. अहमद इकबाल, रणबीर चौहान और अब सुरेंद्र नारायण पांडेय विकास की गति को आगे बढ़ा रहे हैं।
उम्मीदों को लगेंगे पंख
बारहमासी सड़क : इस सड़क के बनने के बाद जिले में फर्राटा भरेंगे वाहन। पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी तो कारोबार भी बढ़ेगा
कोलीढेक झील : 30 करोड़ की लागत से बन रही झील से जहां पेयजल की समस्या दूर होगी वहीं क्षेत्र में वाटर स्पोर्ट्स को भी बढ़ावा मिलेगा
कोइराला पेयजल योजना : इस योजना पर भी स्थानीय निवासियों की उम्मीदें टिकी हैं।
जिले के विकास के लिए सरकार गंभीर है, जिन बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है उन पर तेजी से कार्य कराया जाएगा। 23 सालों में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई नए कार्य हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे। - कैलाश गहतोड़ी विधायक, चंपावत।
जिले में पलायन रुके, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य हों। इसके लिए सरकार अग्रसर हैं। 23 सालों में जिले ने काफी विकास किया है। जिले में कई विकास कार्य प्रगति में है।
पूरन सिंह फर्त्याल, विधायक, लोहाघाट।
जिला बनाओ संघर्ष समिति करेगी कार्यक्रम
चंपावत। जिला बनाओ संघर्ष समिति की ओर से जिले के स्थापना दिवस पर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। संघर्ष समिति अध्यक्ष बसंत तड़ागी ने बताया कि कार्यक्रम में जिले के लिए आंदोलन करने वाले आंदोलनकारियों को सम्मानित किया जाएगा।