नरियालगांव पशु प्रजनन केंद्र में वर्गीकृत सीमैन से पहले कृत्रिम गर्भाधान की तैयारी करती केंद्र
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। सात नवंबर को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नरियालगांव दौरे का असर हुआ है। बद्री (पहाड़ी नस्ल की) गाय के लिए मशहूर नरियालगांव के राजकीय पशु प्रजनन केंद्र को पहली बार 100 वर्गीकृत सीमेन (वीर्य) की स्ट्रा मिली है। उत्तराखंड लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड (यूएलडीबी) देहरादून से इन स्ट्रा के मिलने के बाद सोमवार को पहला कृत्रिम गर्भाधान (एआई) किया गया। परियोजना निदेशक डॉ. त्रिभुवन सिंह के निर्देशन में इस कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया की गई। इस वर्गीकृत सीमेन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इससे बछियाओं के जन्म की संभावना 50 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत तक हो जाएगी।
नरियालगांव पशु प्रजनन केंद्र में 153 गायों समेत कुल 337 पशु हैं। दूध देने वाली गायें अभी सिर्फ 78 हैं। इन गायों से इस वक्त औसतन प्रति माह 25962 लीटर दूध मिल रहा है। 3291 लीटर दूध बछियाओं के उपयोग में आने के अलावा 22671 लीटर दूध गाजियाबाद की हेथा ऑर्गेनिक्स कंपनी को 41.50 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दिया जा रहा है।
वर्गीकृत सीमेन से ये होंगे लाभ
परियोजना निदेशक डॉ. त्रिभुवन सिंह ने बताया कि सामान्य गर्भाधान में बछिया प्रजनन की संभावना 50 प्रतिशत रहती है, लेकिन वर्गीकृत सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान होने से बछिया प्रजनन की संभावना की दर 90 प्रतिशत हो जाएगी। इस वक्त नरियालगांव की बद्री गायें रोजाना औसतन चार लीटर दूध दे रही है। उत्कृष्ट श्रेणी के बद्री सांडों के वर्गीकृत सीमेन से बछियाओं के जन्म से गायों की संख्या बढ़ने के साथ ही दो साल में दूध की मात्रा भी छह से आठ लीटर तक हो जाएगी। दूध उत्पादन में बढ़ोतरी से पशुपालकों की आमदनी बढ़ने के साथ ही नर पशुओं की संख्या भी कम हो जाएगी।