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और गरीबों के मुंह से छीन लिया सस्ता निवाला...

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चंपावत के इंदिरा अम्मा भोजनालय में लटका ताला। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। उम्मीद थी कि 2020 में गरीबों के अच्छे दिन आएंगे, लेकिन साल के पहले ही दिन गरीबों को झटका लगा है। यहां इंदिरा अम्मा भोजनालय में बुधवार से ताले लटक गए। भोजनालय के संचालक ने इसकी सूचना डीआरडीए के सहायक परियोजना निदेशक (एपीडी) को पत्र के जरिये भेज दे दी है। इसमें 1.64 लाख रुपये से अधिक की अनुदान राशि नहीं मिलने भोजनालय का संचालन बंद रखने की चेतावनी दी गई है। भोजनालय बंद होने से बुधवार को कई लोग 30 रुपये थाली के सस्ते और स्वादिष्ट भोजन से वंचित रहे।
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भोजनालय के संचालक गिरधर सिंह फर्त्याल का कहना है कि नौ महीने से करीब 1.64 लाख रुपये के अनुदान की राशि लंबित है। 19 नवंबर 2015 को प्रदेश भर में इंदिरा अम्मा भोजनालय खोले गए थे। तब शासन ने प्रति थाली 10 रुपये अनुदान देने का आदेश दिया था और मार्च 2019 तक अनुदान की राशि मिलती रही लेकिन अब इसे नहीं दिया जा रहा है। संचालक ने अनुदान नहीं मिलने के अलावा सहकारी समिति द्वारा कमरे खाली करने और हैंडपंप से पानी लेने की मजबूरी बताई। एपीडी को भेजे पत्र में फर्त्याल ने कहा कि अनुदान मिलने के बाद भी वह भोजनालय का संचालन नहीं करेंगे। अलबत्ता इसके लिए महिला समूह संचालक की व्यवस्था करा दी जाएगी।
कोट
इंदिरा अम्मा भोजनालय के अनुदान के 1.64 लाख रुपये के बिल कोषागार भेज दिए गए हैं। पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम) से बिल मंजूर नहीं होने से अब इसे आईएफएमएस (इंटीग्रेटेड फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम) से भेजा गया है। भोजनालय के संचालक को सोमवार तक भुगतान होने का भरोसा दिया गया है। - विम्मी जोशी, सहायक परियोजना निदेशक।
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तीन महिलाओं सहित चार लोगों के रोजगार पर पड़ेगी मार
चंपावत। जिले के इस एकमात्र इंदिरा अम्मा भोजनालय में खाना बनाने की जिम्मेदारी महिला स्वयंसेवी समूह की तीन महिलाओं की है। मगर भोजनालय बंद होने से इन महिलाओं और संचालक के रोजगार पर भी असर पड़ा है। ब्यूरो
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