Amar ujaala Health abhiyan in Champawat
कोरोना संक्रमण ने चंपावत जिले को भी अपने आगोश में लिया था। 2.60 लाख आबादी वाले इस जिले में 79 लोगों की मौत हुई थी। पहली लहर में 11 और दूसरी लहर में 68 जिंदगियां खत्म हो गईं। दूसरी लहर के दौरान जून के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में जरूर सुधार हुआ। खासकर शैय्याओं, आईसीयू, ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट (ओजीपी) लगने से स्थिति सुधरी। बजट और डॉक्टरों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है लेकिन आईसीयू बनने के बावजूद इसका खास उपयोग नहीं हो पा रहा है। तीनों प्रमुख अस्पताल में कुल 12 आईसीयू हैं, लेकिन स्टाफ न होने से अस्पताल से ही कार्मिकों को संबद्ध करने से इनके संचालन में दिक्कतें आ रहीं हैं।
जिले में 107 डॉक्टरों के सापेक्ष 103 संविदा और बांडेड डॉक्टर हैं। कोरोना काल के बाद स्वास्थ्य के बजट में 141.88 प्रतिशत वृद्धि हुई है। मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 में स्वास्थ्य बजट 297.30 लाख रुपये है, जबकि कोरोना काल से पहले 2019-20 में ये बजट महज 122.91 लाख रुपये था। इसी दौरान चंपावत जिला अस्पताल, लोाहघाट और टनकपुर उप जिला अस्पताल में ओजीपी लगे। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि चंपावत जिला अस्पताल में 100 लीटर प्रति मिनट, लोहाघाट में 167.50 एलपीएम और टनकपुर एसडीएच में 500 एलपीएम का प्लांट है।
पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी का कहना है कि चंपावत जिला अस्पताल में 300 एलपीएम का एक ओजीपी निर्माणाधीन भी है। जिले में डी टाइप (जंबो) 654 और 336 बी टाइप (छोटे) ऑक्सीजन सिलिंडर, 155 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी हैं। चंपावत जिले में ऑक्सीजन वाले बेड भी बढ़ गए हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि जिले में 161 बेड हैं। चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर, पाटी, बाराकोट, बनबसा में ये ऑक्सीजनयुक्त बेड हैं। ऑक्सीजनयुक्त बेड की संख्या दूसरी लहर काल से 20 अधिक है।