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विश्वव अल्जाइमर दिवस आज

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बनबसा (चंपावत)। अल्जाइमर यानी भूलने की बीमारी भी गंभीर है। इसे आयुर्वेद में स्मृतिभ्रंश कहते हैं। यह लगातार बढ़ रही है। इस बीमारी में कई बार रोगी अपना नाम तक भूल जाता है। आधुनिक जीवन शैली, गलत खानपान, अत्यधिक शराब पीने, नशाखोरी, मधुमेह, रक्तचाप, सिर में चोट लगने एवं वंशानुगत आदि कारण से यह बीमारी होती है। इस बीमारी से लोगों को जागरूक करने को प्रतिवर्ष 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है।
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जर्मनी के चिकित्सक डॉ. एलोइस अल्जाइमर ने वर्ष 1906 में इस बीमारी का पता लगाया था, इसलिए उन्हीं के नाम पर इस बीमारी को पहचाना गया। इस बीमारी में मरीज में भूलने की शिकायत जन्म लेती है। याददाश्त कम होने के कारण अल्जाइमर का मरीज ठीक से कोई निर्णय नहीं ले पाता है। आमतौर पर घर का पता भूलना, अपनी चीजें रखकर भूलना, मूड बदलना, गुस्सा आना, बिना वजह घंटों तक एक ही काम में लगना आदि अल्जाइमर के लक्षण हैं।
अल्जाइमर भूलने का रोग है, जो कई बार जेनेटिक होता है। कई बार तीसरी पीढ़ी में इस रोग के लक्षण पाए जाते हैं। अभी अल्जाइमर का कोई ठोस इलाज नहीं है।
-डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ चंपावत।
अल्जाइमर रोग में रोगी के दिमाग के सेल घिसने लगते हैं, जिससे उनकी याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है। शराब के अत्यधिक सेवन से भी अल्जाइमर हो सकता है।
- डॉ.. मो. उमर, चिकित्साधिकारी, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बनबसा।
अनियमित जीवन शैली, अनियमित खानपान, अनिद्रा, चिंता, परेशानी, भटकाव, अवसाद, नकारात्मक सोच, कुढ़न आदि से अल्जाइमर रोग होता है। नाड़ी शोधन, योग साधना, प्राणायाम के अलावा अश्वगंधा, सर्पगंधा, शंखपुष्पी, ब्राह्मी, ज्योतिष्मति, हरिद्रा, कपिकछू आदि का चूर्ण गाय के दूध के साथ सेवन कराया जाता है।
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- डॉ. प्रकाश सिंह बसेड़ा, आयुर्वेदाचार्य, आयुर्वेदिक चिकित्सालय बनबसा।
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