पुलिस विभाग के एएसआई की हृदयाघात से मौत हो गई। इस मौत के लिए आपात चिकित्सा सेवा 108 सेवा की गड़बड़ी को भी जवाबदेह माना जा रहा है।
पुलिस विभाग के मुताबिक वायरलेस में एएसआई जनक चंद (45) पुत्र धनी चंद निवासी खटीमा को रविवार रात छाती में दर्द हुआ। उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें उच्च केंद्र के लिए रेफर किया गया। आपात सेवा 108 ठीक न होने से पुलिस कर्मी को जिला पंचायत सदस्य गोविंद सिंह सामंत ने निजी वाहन से टनकपुर भेजा।
मगर टनकपुर संयुक्त अस्पताल पहुंचने से पूर्व बस्तिया के पास उन्होंने दम तोड़ दिया। सीएमएस डॉ. आरके जोशी ने बताया कि पुलिस कर्मी के साथ निजी वाहन में अस्पताल के एक कर्मी को भेजने के अलावा ऑक्सीजन सिलेंडर दिया गया। मगर ये सिलेंडर भी रास्ते में खत्म हो गया। खटीमा निवासी एएसआई जनक चंद के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। एसपी आरसी राजगुरु, सीओ पीएस कफलिया, एसएस गुसांई आदि ने शोक जताया। सोमवार को टनकपुर के शारदा घाट में पुलिस सम्मान के साथ गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार हुआ।
दिवंगत पुलिस कर्मी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया
बनबसा (चंपावत)। चंपावत में कार्यरत पुलिस हेड ऑपरेटर वायरलेस मेकेनिकल (एचओएम) स्व. जनक चंद (45) का सोमवार को यहां शारदा घाट पर पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जनक मूल रूप से पिथौरागढ़ के निवासी थे, जो खटीमा में बस गए थे। अंतिम संस्कार में सीओ राजन सिंह रौतेला समेत टनकपुर कोतवाल अरुण कुमार वर्मा, बनबसा थानाध्यक्ष राजेश पांडेय आदि थे।
व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर गई पुलिस कर्मी की मौत
चंपावत। महज 45 वर्ष की उम्र में पुलिस के एक एएसआइ की हृदयाघात से मौत हो गई। यह महज एक मौत नहीं थी, बल्कि इसने समूचे स्वास्थ्य सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आपात चिकित्सा सेवा 108 के पहिए लंबे समय से जाम हैं। वहीं जिले में हृदय रोग के इलाज के इलाज की व्यवस्था नहीं है। टनकपुर, लोहाघाट में ट्रामा सेंटर एक साल पूर्व हस्तांतरित हो चुके हैं लेकिन न इनमें चिकित्सकों आदि कर्मियों की तैनाती हो सकी है और न ही उपकरण मिल सके हैं। चंपावत जिले में पांच आपात चिकित्सा सेवा 108 वाहन सेवा के बुरे हाल हैं। टायरों की कमी ने इस सेवा के पहियों को जाम कर दिया है। चंपावत की 108 सेवा तीन सितंबर से प्रभावित है। यह सेवा मात्र 12 किमी के दायरे से आगे नहीं बढ़ पा रही है। लोहाघाट की 108 सेवा छह सितंबर से ठप है। यहां 19 अगस्त से खुशियों की सवारी के पहिए भी जाम हैं। खुशियों की सवारी के बंद होने से अस्पताल से जच्चे-बच्चों को घर तक निजी खर्चे पर जाना पड़ रहा है। रीठा साहिब की आपात सेवा के पहिए भी जाम हो गए हैं। पाटी की 108 सेवा भी बेहद सीमित दायरे तक ही जा पा रही है। बस टनकपुर की 108 सेवा ही चालू है। चंपावत से अस्पताल ले जाने के बाद पुलिस कर्मी को भी निजी वाहन से ले जाया गया। निजी वाहन में पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य चिकित्सकीय सुविधा नहीं होती है। वाहन की तलाश में भी करीब एक घंटा लगता है। जो आपातकाल में जिंदगी पर भारी पड़ता है। चंपावत जिले में ईसीजी, कार्डियोग्राफी मशीन तो है, लेकिन इसके परीक्षण के लिए किसी भी अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट से लेकर फिजीशियन तक कोई नहीं है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि आपात चिकित्सा सेवा 108 के ठीक न होने से मरीजों की परेशानी बढ़ी है। अस्पताल प्रशासन कई बार उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दे चुका है लेकिन हालात नहीं सुधरे। कार्डियोलोजिस्ट की तैनाती के लिए भी लगातार आग्रह किया जा रहा है।
कोट
जिले की आपात चिकित्सा सेवा 108 टायरों की कमी से प्रभावित हो रही है। टायरों के लिए धन आवंटित किया जा चुका है। अगले तीन दिनों में नए टायर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
- मनीष टिंकू, राज्य समन्वयक
आपात चिकित्सा सेवा 108