पाटी (चंपावत)। सरकार के पिरूल लाओ, पैसा पाओ मिशन को लेकर ग्रामीण महिलाएं खुश हैं। उन्होंने कहा कि 50 रुपये पिरूल खरीद से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलेगा। जंगल में लगने वाली आग पर भी काबू पाया जा सकेगा। जंगल में पड़ा रहने वाला पिरूल लोगों के लिए आय का जरिया बनेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए यह अच्छा अवसर होगा।
सरकार की इस पहल के लोगों के चेहरे खिल गए हैं। अब उनको इस योजना के जल्द शुरू होने की उम्मीद है। यू कॉस्ट भिंगराड़ा में आईआईपी देहरादून की मदद से ब्रिकेट यूनिट की स्थापना जून में करने वाला है। क्षेत्र की महिलाओं पांच रुपये किलो पिरूल खरीदने की तैयारी थी। महिलाओं ने पहले ही वहां पिरूल एकत्रीकरण का काम भी शुरू कर दिया है। अब इस यू कॉस्ट की इस पहल के बाद क्षेत्र में पिरूल एकत्रीकरण से महिलाएं आत्मनिर्भर तो बनेंगी साथ ही उनकी आर्थिकी में सुधार होगा। संवाद
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सरकार का पिरूल लाओ, पैसा पाओ मिशन वनाग्नि की रोकथाम के लिए सराहनीय पहल है। इससे फायर सीजन में जंगलों में आग नहीं लगेगी और लोग अधिक से अधिक संख्या में पिरूल एकत्रीकरण करने का काम करेंगे। - गीता भट्ट, भिंगराड़ा।
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यू कॉस्ट क्षेत्र में ब्रिकेट यूनिट लगाने वाला है। अगर इस तरह की यूनिट अन्य जगह भी लगाई जाएंगी तो निश्चित तौर पर यह वनाग्नि की रोकथाम होगी। सरकार को बायो फ्यूल भी मिलेगा। पिरूल एकत्रीकरण से लोग आर्थिक रूप से मजबूत भी होंगे। - हीरा देवी, भिंगराड़ा।
-गीता भट्ट, प्रधान, भिंगराड़ा।
-हीरा देवी, स्थानीय, भिंगराड़ा।
जंगल में गिरे कचरे से उद्योग लगाकर वनाग्नि रोकी जा सकती : बृजभूषण
थल (पिथौरागढ़)। देहरादून में संस्कृति विभाग के पूर्व फोटो अधिकारी रहे बृजभूषण सिंह रावत का कहना है कि पिरूल हो या अन्य किसी भी तरह का जंगल का कचरा सोने से कम नहीं है। इसका सही तरीके से उपयोग हो तो पहाड़ में उद्योग से रोजगार लगाकर वनाग्नि को रोका जा सकता है। उनके पास इसका समाधान है। यदि सरकार और विभाग उनकी इस कार्य योजना को मंजूरी दे तो वह इस पर कार्य करने के लिए तैयार हैं। जंगल में पड़े पिरूल और अन्य कचरे को सॉलिड वुड में सरलता से बदला जा सकता है। जिससे पेड़ काटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पिरूल को बुरादे में बदलकर कंप्रेस करके उत्कृष्ट बोर्ड बनाए जा सकते हैं। इससे फ्लोर टाइल्स, धूप-अगरबत्ती, ब्रिकेट, कोल ब्रिकेट, हवन सामग्री, पेंसिल में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे रोजगार उद्योग के साथ राज्य सरकार को राजस्व मिलेगा। संवाद
- बृजभूषण सिंह रावत।