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नसबंदी के बाद महिलाओं को फर्श पर लिटाया

Fri, 09 Dec 2016 10:48 PM IST
हयात राम/अमर उजाला, चंपावत/श्रीरीठा साहिब।
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महिलाओं को फर्श पर लिटाया - फोटो : नसबंदी के बाद महिलाओं को फर्श पर लिटाया
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आबादी पर नियंत्रण के लिए महिलाओं को नसबंदी के लिए प्रेरित किया जाता है, लेकिन नसबंदी करने वाली महिलाओं के लिए लधिया घाटी के सबसे बड़े अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं है। यहां नसबंदी के ऑपरेशन के बाद महिलाओं को बेड के बजाय फर्श पर दरी में लिटाया जाता है।

जिला मुख्यालय से 75 किमी दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को लगे नसबंदी शिविर में 23 महिलाओं के ऑपरेशन हुए। जिला अस्पताल से आए सर्जन डॉ.आरपी खंडूरी ने ऑपरेशन किए। महिला स्वास्थ्य कर्मी गंगोत्री धामी, राधा, सविता जोशी, नीमा नेगी आदि ने इसमें हाथ बंटाया। ऑपरेशन तो हुए, लेकिन नसबंदी कराने वाली महिलाओं को इसके बाद आराम करने के लिए न तो चारपाई और न ही बिस्तर मुहैय्या हुए। ऑपरेशन के लिए श्रीरीठा साहिब से 28 किमी लधौली, 23 किमी दूर गुरौली, 22 किमी दूर मंगललेख, 15 किमी दूर साल, 10 किमी दूर मछियाड़, 18 किमी दूर टांण, 16 किमी दूर भिंगराड़ा, 9 किमी दूर परेवा आदि जगहों से आई महिलाओं को अस्पताल परिसर में फर्श पर दरी बिछाकर आराम कराया गया।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत नसबंदी के लिए महिलाओं को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहन स्वरूप कई कदम उठाए जाते हैं। महिलाओं को प्रोत्साहन के रूप में 1400 रुपए दिए जाते हैं, लेकिन महिलाओं को ये रकम नहीं मिल सकी। फार्मेसिस्ट दीपक गिरि गोस्वामी का कहना है कि श्रीरीठा साहिब के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मात्र चार ही बेड मंजूर है, लेकिन अस्पताल में बेड महज दो हैं। एक बेड डिलीवरी कक्ष में, तो दूसरा इंजेक्शन वार्ड में है।
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नसबंदी शिविर में महिलाओं को सभी अनुमन्य सुविधाएं मुहैय्या कराई जाती है। श्रीरीठा साहिब शिविर में नसबंदी के बाद महिलाओं को बाहर फर्श पर लिटाने की जानकारी नहीं है। कई बार धूप की वजह से महिलाएं ऐसा करती हैं। अलबत्ता मामले की जांच की जाएगी। -डा.डीएल साह, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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