स्वास्थ्य विभाग कैसे मरीजों से खिलवाड़ करता है, यह सोमवार को नजर आया। सीएमओ कार्यालय में लगे दिव्यांग शिविर में जिले भर से पहुंचे दिव्यांगों के प्रति विभाग लापरवाह बना रहा। दिव्यांग तीन घंटे तक परेशान रहे। एक भी दिव्यांग प्रमाणपत्र नहीं बना। नाराज दिव्यांगों और उनके परिजनों ने प्रदर्शन किया। बता दें कि जिले में अस्थि रोग विशेषज्ञ का पद खाली है।
हर माह के पहले सोमवार को लगने वाला दिव्यांग कैंप छह मार्च को लगा। टनकपुर से डिकरी देवी, पंचेश्वर से पार्वती देवी, चमदेवल से मीना, दलीप सिंह और देवेंद्र, कानाकोट से सावित्री देवी और केशवी देवी, नौमाना से रत्ना देवी, निडिल से देवेंद्र और चौमेल से मोहन चंद्र समेत तमाम दिव्यांग और उनके परिजन दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने पहुंचे थे। लेकिन अस्थि रोग विशेषज्ञ के नहीं होने से उन्हें मायूस लौटना पड़ा। इन परेशान दिव्यांगों का कहना था कि वे दिसंबर माह से ही हर विकलांग कैंप में आ रहे हैं लेकिन आज तक उनके प्रमाणपत्र नहीं बन सके हैं।
दिव्यांगों के परिजन मदन कलौनी, मोहन राम, मोहन सिंह, भीम सिंह, दीवान सिंह और बृजमोहन पुनेठा का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग अस्थि रोग विशेषज्ञ नहीं होने की सूचना उपलब्ध नहीं कराता है। यदि विभाग समय से उन्हें सूचना देता तो उन्हें परेशानी नहीं होती और धन और समय की भी बचत होती।
जिले में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं
हर माह के पहले सोमवार को लगने वाले दिव्यांग कैंप में मानसिक रोग, नेत्र सर्जन, ईएनटी और अस्थि रोग विशेषज्ञ का पैनल बनाया जाता है। जिले में इस वक्त एक संविदा समेत दो नेत्र सर्जन की ही तैनाती है। मानसिक रोग, ईएनटी और अस्थि रोग विशेषज्ञ पूरे जिले में नहीं है। नवंबर 2016 तक टनकपुर में अस्थि रोग विशेषज्ञ की तैनाती थी। लेकिन उनके तबादले के बाद जिला अस्थि रोग विशेषज्ञ विहीन हो गया।
जिले में अस्थि रोग विशेषज्ञ की तैनाती को लेकर शासन में कई बार पत्राचार किया गया है। अस्थि रोग विशेषज्ञ की कमी को दूर करने के लिए दिव्यांगों का बेस अस्पताल हल्द्वानी के लिए रेफरल सेंटर बनाया जा रहा है। आगे से दिव्यांगों को परेशानी नहीं हो, इसके लिए मरीजों को पहले ही सूचना दी जाएगी।
डॉ. डीएल शाह, सीएमओ, चंपावत।