शारदा नदी से खनिज निकासी भले ही अभी नहीं खुली है, लेकिन खनन कारोबार की आड़ में कथित तौर पर कालाधन खपाने की चर्चाएं बाजार में आम है। बताया जा रहा है कि कुछ खनिज स्टाकिस्टों द्वारा खनिज निकासी करने वाले ट्रक मालिकों को एडवांस भुगतान देकर करीब ढाई करोड़ रुपए कालाधन खपाया है। इधर, प्रशासन इस सूचना से बेखबर है। एसडीएम अनिल चन्याल का कहना है कि इस तरह की सूचना नहीं है, यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
पांच सौ-हजार के नोटबंदी के बाद से कालाधन डंप किए लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। ऐसे लोग कालेेधन को ठिकाने लगाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। कोई रिश्तेदारों के खाते में छूट की धनराशि जमा करा रहा है, तो कोई कर्मचारियों को वेतन भुगतान में पांच सौ-हजार के नोट देकर कालेधन को खपाने में लगा है।
इसी तरह यहां के बड़े खनिज स्टाकिस्टों द्वारा कारोबार के नाम पर कालेधन को ठिकाने लगाने की चर्चाएं हैं। सूत्रों के मुताबिक इन खनिज कारोबारियों ने खनिज सामग्री ढोने वाले ट्रक मालिकों को एडवांस भुगतान देकर अपना कालाधन ठिकाने लगाया है। ऐसे स्टाकिस्टों ने खनन गेट खुलने पर खनिज सामग्री अपने स्टाक में डालने की शर्त पर एक ट्रक मालिक को (पांच सौ-हजार के नोट) डेढ़ से दो लाख रुपए तक का एडवांस भुगतान किया है।
शारदा से खनन कार्य के लिए क्षेत्र में करीब ढाई सौ शक्तिमान ट्रक हैं, लेकिन स्टाकिस्टों से सिर्फ उन्हीं ट्रक मालिकों को एडवांस भुगतान दिया है, जो उनके विश्वसनीय हैं। एसडीएम का कहना है कि अब तक ऐसी सूचना नहीं मिली है। उनका कहना है कि यदि स्टाकिस्टों ने एडवांस भुगतान कर कालाधन खपाया है तो ऐसे ट्रक मालिकों के खातों की भी जांच होगी।