चंपावत। जिले में कोरोना काल में पुलिस ने सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद विज्ञापन निषेध और व्यापार एवं वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण अधिनियम 2003 (कोटपा) के तहत 1191 लोगों के चालान किए हैं, जबकि पिछले दो सालों में अधिनियम के तहत 548 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।
एसपी लोकेश्वर सिंह के अनुसार कोटपा अधिनियम की धारा-5 के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन का निषेध है। सार्वजनिक स्थल पर सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, तंबाकू, गुटका, पान मसाला आदि का सेवन अपराध घोषित किया गया है। अधिनियम में विद्यालय परिसर के एक सौ मीटर परिधि में तंबाकू उत्पादों बिक्री भी मना है। ढाई लाख से अधिक की आबादी वाले चंपावत जिले में तकरीबन 52 फीसदी आबादी 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की है। इनमें करीब 37 हजार से अधिक लोग सिगरेट-बीड़ी पीकर अपने दिल के साथ समाज की खुली हवा में जहर घोल रहे हैं। एक अध्ययन के मुताबिक सार्वजनिक स्थल पर सिगरेट पीने से तीन फीसदी लोग निष्क्रिय धूम्रपान की चपेट में आ रहे हैं। गुटका, पान मसाला खाने वालों की तादाद सिगरेट पीने वालों से भी डेढ़ गुनी है।
कैंसर की बीमारी के लिए जिम्मेदार है तंबाकू
चंपावत। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरके जोशी के अनुसार तंबाकू में चूना मिलाकर चूसना या चूना लगे पान को ज्यादा समय तक मुंह में दबाए रखने से जीभ, होंठ, तालू और गले के ऊपरी हिस्से में कैंसर हो जाता है, जबकि सिगरेट-बीड़ी के सेवन से गले का कैंसर होता है।
तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत चलेगा जागरूकता अभियान
चंपावत। लोगों को तंबाकू के सेवन करने से रोकने के लिए तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत तंबाकू का सेवन करने वालों की काउंसलिंग कर निकोटिक्स दवा बांटी जा रही है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से चलाए जा रहे नशामुक्त भारत अभियान के तहत समाज कल्याण विभाग की ओर से चयनित स्वयंसेवक इस वर्ष मार्च माह के बाद जिलेभर में जागरूकता अभियान चलाएंगे।