टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑल वेदर रोड निर्माण में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा की अनदेखी को वन विभाग ने गंभीरता से लेते हुए कार्यदायी विभाग एनएच को वन संरक्षण एवं भारतीय वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, कार्यदायी विभाग इस मामले में अब तक लापरवाह बना हुआ है। उसने सड़क कटिंग का मलबा एकत्र करने के लिए कहीं भी डंपिंग यार्ड नहीं बनाए हैं।
चारधाम परियोजना के तहत टनकपुर से पिथौरागढ़ तक डेढ़ सौ किमी लंबी ऑल वेदर रोड का निर्माण तेजी से चल रहा है, लेकिन निर्माण में ठेकेदार एजेंसी आरजी बिल्डवेल द्वारा नियमों की जमकर अनदेखी की जा रही है। टेंडर की शर्तों के मुताबिक सड़क कटिंग का मलबा एकत्र करने को जगह-जगह वायरक्रेट और दीवार बनाकर डंपिंग यार्ड बनाए जाने हैं, लेकिन कार्यदायी विभाग ने डंपिंग यार्ड बनाए बगैर सड़क की कटिंग शुरू करा दी और पहाड़ियों का मलबा सड़क से नीचे की ओर फेंक दिया। इस मामले में एनएच के अधिशासी अभियंता एलडी मथेला का कहना है कि वन विभाग के साथ सर्वे कर स्थान चिन्हित कर डंपिंग यार्ड बनाए जाने हैं।
वन विभाग को इसके लिए पत्र लिखा गया है।
इधर, एनएच के अधिशासी अभियंता और बूम रेंज (चंपावत वन प्रभाग) के वन क्षेत्राधिकारी भूपेंद्र कुमार महरा के बीच हुए पत्राचार की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। एनएच के अधिशासी अभियंता द्वारा वन क्षेत्राधिकारी को 18 अगस्त 2017 को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि बीआरओ के समय ही मार्ग की भूमि हस्तांतरित कर दी गई थी एवं उसी भूमि पर ऑल वेदर रोड का निर्माण किया जा रहा है। पत्र में जनवरी 2019 तक सड़क निर्माण की समयबद्धता का हवाला देते हुए वन क्षेत्राधिकारी से सहयोग का आग्रह किया गया है, जबकि वन क्षेत्राधिकारी द्वारा 11 सितंबर 2017 को अधिशासी अभियंता को भेजे पत्र में कहा गया है कि सड़क निर्माण में बाधक पेड़ों का चिन्हीकरण ही नहीं हुआ है और सड़क निर्माण शुरू कर पेड़ों को क्षतिग्रस्त किया जा रहा है।
साथ ही काटी जा रही पहाड़ियों का मलबा नियमपूर्वक निस्तारण न कर सड़क से नीचे फेंका जा रहा है। बूम रेंज के वन क्षेत्राधिकारी भूपेंद्र कुमार महरा ने 27 सितंबर 2017 को एनएच के अधिशासी अभियंता को भेजे पत्र में कहा है कि पेड़ों का चिन्हीकरण न कर सड़क से नीचे फेंके जा रहे मलबे से पेड़ों को नुकसान और वन्यजीवों की मौत होने की आशंका है। उन्होंने वन संरक्षण अधिनियम एवं भारतीय वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है। इतना ही नहीं सड़क के पहले हिस्से पर चल रहे निर्माण कार्य की ही तर्ज पर बेलखेत से चंपावत तक के दूसरे हिस्से पर भी कार्यदायी ठेकेदार कंपनी शिवालया कंस्ट्रक्शन कंपनी सड़क कटिंग कर पहाड़ी का मलबा सड़क से नीचे फेंककर नियमों की अनदेखी कर रही है।