यहां से लगभग छह किमी. दूर वनाच्छादित पहाड़ी पर स्थित एबटमाउंट को नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से यहां सभी निर्माण कार्य पूरे कर लिए गए हैं।
कार्यदायी संस्था निर्माण निगम ने चार करोड़ 95 लाख, 70 हजार रुपये लागत से आठ ईको लांग हट, एक बहुउद्देशीय हाल, मार्डन टॉयलेट, दो व्यू प्वांइट व चहारदीवारी आदि का निर्माण किया गया है। यहां बोरिंग कर पेयजल समस्या का समाधान हो गया है। फ्रांस से आयातित कैमिकल से ट्रीट की गई लकड़ी से बनाए गए एक लॉग हट की लागत 32 लाख रुपये आई है।
लकड़ी की जांच एफआरआई दिल्ली के श्रीराम इंस्टीट्यूट से कराई गई है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद विभाग की ओर से गठित तकनीकी टीम द्वारा भी निर्माण कार्य का निरीक्षण किया जा चुका है जिसकी गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई है।
इस स्थान से हिमालय का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। सन राईज एवं सन सेट का भी नजारा देखने लायक होता है। पर्यटन विभाग इस सुरम्य स्थान की ओर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस स्थल को उड़ान सेवा में शामिल करने का भी प्रयास कर रहा है। इस स्थान में लगभग ढाई हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फील्ड बना हुआ है जहां दस सीटर वाले चौपर आसानी से उतर सकते हैं।
वर्तमान में यहां प्राइवेट लैंडिंग करते हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार गठित समिति की रिपोर्ट आने के बाद विभाग का इरादा इसे पीपीपी मोड में संचालित करने का है। शासन स्तर पर इस मुद्दे को लेकर सहमति बन चुकी है।
तकनीकी रिपोर्ट मिलने के बाद होगी टेंडरिंग
लोहाघाट (चंपावत)। जिला पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट का कहना है कि उड़ान योजना में एबटमाउंट समेत रीठासाहिब, पाटी आदि महत्वपूर्ण स्थलों को जोड़ा गया है। तकनीकी रिपोर्ट मिलने के बाद शासन स्तर पर पीपीपी मोड में देने के लिए टेंडरिंग की व्यवस्था शुरू हो जाएगी। यह स्थल उत्तराखंड में प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में उभर कर सामने आएगा।