जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) लोहाघाट को अन्यत्र स्थानांतरित करने और बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण लोहाघाट डायट परिसर में न कर चंपावत के राकड़ी फुलारा में करने के मामले की शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम ने जांच की। इस दौरान जांच टीम को लोगों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा। आक्रोशित लोगों ने तत्काल डायट के प्राचार्य का यहां से तबादला करने की मांग की।
विधायक पूरन सिंह फर्त्याल की ओर से पूर्व में इस मामले को मुख्य सचिव रामा स्वामी और निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण सीमा जौनसारी के सामने प्रमुखता रखा था। सोमवार को मामले की जांच के लिए पहुंची एडी नैनीताल सुषमा सिंह, मुख्य शिक्षाधिकारी नैनीताल रघुनाथ लाल आर्य, मुख्य शिक्षाधिकारी चंपावत डीएस राजपूत ने डायट पहुंच कर डायट के संबंध में की गई कार्यवाही की पूरी पत्रावली देखी तथा इसकी कॉपी वे अपने साथ ले गए। इस दौरान उन्होंने डायट के लिए हस्तांतरित 146 नाली भूमि का भी निरीक्षण किया। मौके पहुंचे विकास संघर्ष समिति के लोगों ने जांच टीम के सामने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि डायट के प्राचार्य केसी शाक्य ने स्थानीय राजनीति में लिप्त होकर शासनादेश को दरकिनार करते हुए डायट का बहुउद्देशीय भवन छल से चंपावत राकड़ी फुलारा की ओर हस्तांतरित करने की पूरी कोशिश की। उन्होंने एडी से प्राचार्य का तत्काल यहां से स्थानांतरण करने की मांग की।
एडी ने प्राचार्य के सामने दस्तावेजों को देखते हुए प्राचार्य शाक्य को फटकार लगातार हुए कहा कि पत्राचार के माध्यम से अगर समय से पूरी स्थिति शासन के सम्मुख स्पष्ट रूप से रखी होती तो विवाद नहीं होता। लोगों का कहना था कि लोहाघाट डायट में बहुउद्देशीय भवन की कमी के कारण डायट को मान्यता नहीं मिल पा रही थी, जिसे देखते हुए शासन द्वारा लोहाघाट में बहुउद्देशीय भवन स्वीकृत किया गया था। लेकिन बहुउद्देशीय भवन लोहाघाट में न बनाकर उसे चंपावत के राकड़ी फुलारा में बनाया जा रहा था। लोगों द्वारा इसका विरोध करते हुए आंदोलन शुरू कर दिया गया था। जिसे देखते हुए जिलाधिकारी ने बहुउद्देशीय भवन के निर्माण कार्य में रोक लगा दी थी। मौके पर प्राचार्य केसी शाक्य, प्रहलाद सिंह मेहता, भूपाल मेहता, सचिन जोशी, गोविंद बोहरा, गोविंद वर्मा, संजय मुरारी, कीर्ति बगौली, हयात सिंह तड़ागी, बची सिंह रावत, बलवंत करायत, दीपक सुतेड़ी आदि मौजूद थे।