टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि धाम स्थित ज्वाला माता मंदिर की पुजारी शांति ज्याला का कहना है कि पूर्णागिरि में रोपवे का निर्माण हो, लेकिन इसके निर्माण में मंदिर को आंच नहीं आनी चाहिए। हालांकि सड़क किनारे यह मंदिर सरकारी जमीन पर बना हुआ है।
पूर्णागिरि में ज्वाला मंदिर से काली मंदिर तक रोपवे लगाने की अमर उजाला में खबर छपने के बाद पूर्णागिरि पहुंची खटीमा निवासी ज्वाला माता मंदिर की पुजारी शांति ज्याला ने दावा किया कि उनका मंदिर हिमाचल के कांगड़ा जिले में स्थित ज्वाला मंदिर की शाखा है। उनका दावा था कि मां ज्वाला देवी के आदेश पर ही पूर्णागिरि में मंदिर की स्थापना की गई।
पुजारी शांति ज्याला ने बताया कि मेरे पति कैप्टन सीएस ज्याला हिमाचल में तैनात थे। तब मेरी उम्र करीब 27 वर्ष रही होगी। चैत्र नवरात्र में मैं पति के साथ कांगड़ा जिले के ज्वाला मंदिर दर्शन को गई। जहां अचानक मुझ पर माता अवतरित हो गईं। परिवार के लोग मुझे पागल समझने लगे। पति हिमाचल से मुझे खटीमा स्थित घर छोड़ गए, लेकिन मैं दोबारा अकेली कांगड़ा के ज्वाला मंदिर पहुंची। माता ज्वाला ने सपने में आदेश दिया कि मैं पूर्णागिरि में उनके मंदिर की स्थापना करूं। 1991 में मैंने पूर्णागिरि में मंदिर की स्थापना की, जिसके बाद मां ने मुझे अवतार से मुक्त कर दिया। उन्होंने बताया कि पूर्णागिरि मार्ग के निर्माण के समय ज्वाला माता के मंदिर की पहाड़ी को काटने का भरसक प्रयास किया गया था, लेकिन पहाड़ी नहीं कटी।