लोहाघाट। शिशु के लिए मां का दूध अनमोल है। इसका कोई विकल्प नहीं। ये कहना है अद्वैत आश्रम मायावती के धर्मार्थ चिकित्सालय की महिला रोग विशेषज्ञ डा. विदिता गुले का। उनका कहना है कि मां के दूध की भरपाई डिब्बाबंद दूध से नहीं की जा सकती। शिशु के जन्म के बाद से कुपोषण और अन्य घातक जानलेवा बीमारियों की चपेट में आना, वजन और लंबाई कम होना जैसे कई कुप्रभाव बच्चे पर पड़ते हैं।
डा. विदिता का कहना है कि प्रसव के बाद महिला के स्तनों से निकलने वाला पीला गाढ़ा दूध ईश्वर की ऐसी कृति है कि वह बच्चे के लिए किसी अमृत के समान होता है। मां के दूध में रोग प्रतिरोधी क्षमता होती है और उसका तेजी से शारीरिक विकास भी होता है।
प्रसव के बाद माताओं को आहार पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इसका असर सीधे बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है।