चंपावत। जाड़ों में पहाड़ों में पाला, तो मैदान में धुंध आवाजाही में सबसे तगड़ी चुनौती है। इसकी वजह से हादसों का खतरा बढ़ जाता है। अब परिवहन विभाग ने हादसों पर नियंत्रण करने के लिए अभियान चलाने का ऐलान किया है। इसके लिए वाहनों के पीछे की लाल लाइट और धुंध में चमकने वाली लाइटों पर खास ध्यान दिया जाएगा।
एआरटीओ (सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी) विमल पांडेय का कहना है कि इन दिनों पहाड़ी हिस्सों में बापरू, बनलेख, चल्थी समेत कई जगहों में पाला आवाजाही के लिए मुसीबत बन रहा है, जबकि मैदानी इलाके में धुंध से दुश्वारी बढ़ रही है। हादसों पर लगाम कसने को परिवहन विभाग वाहनों के पीछे अनिवार्य रूप से रिफ्लेक्टर और धुंध के लिए फॉग लाइट लगाने की मुहिम चलाएगा। इसके अलावा विभाग राजमार्ग पर चल्थी और बेलखेत के बीच पैराफिटविहीन जगह पर पुराने टायरों की मदद से पैराफिट लगाने की भी पहल कर रहा है।
वहीं 11 जनवरी से सड़क सुरक्षा सप्ताह का आयोजन किया जाएगा, जिसके तहत हादसों पर लगाम कसने को जागरूकता पर जोर दिया जाएगा। वाहनों की फिटनेस, गति सीमा का पालन, स्कूलों में जागरूकता आदि की जानकारी दी जाएगी।
चंपावत में 23 हादसे, 16 मौतें
चंपावत जिले में पिछले साल कुल 23 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसमें 16 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा 75 लोग घायल हुए। सबसे खौफनाक वाकया दो बारात की बसों की दुर्घटना थी। बौतड़ी में तीन और वालिग के पास हुए बारात बस हादसे में सात लोगाें की मौत हुई थी।