चंपावत। चंपावत सहित कुमाऊं क्षेत्र के वनों में इन दिनों बुरांश के फूलों की लालिमा बिखरी है। बुरांश का फूल जहां प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ाने में सहायक है, वहीं इस फूल से बनने वाला जूस रोजगार संवर्द्धक होने के साथ ही सेहत लिए भी बेहद मददगार साबित हो रहा है। जिसके चलते मैदानी क्षेत्रों में भी बुरांश के जूस की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शीतल पेय का विकल्प बनकर स्थानीय लोगों के लिए मौसमी रोजगार का प्रमुख जरिया भी बन रहा है।
बुरांश (वनस्पति नाम रोडोडेंड्रम अरबेरियम) साल भर हरा भरा रहने वाला नैसर्गिक वर्ग का पुष्पीय वृक्ष है। 15 से 25 फीट औसत ऊंचाई वाले इस वृक्ष की तथा गोलाई चार से छह फीट होती है। चिकित्सकों का मानना है कि बुरांश का जूस कई बीमारियों के इलाज में मददगार है। चीनी रहित बुरांश का जूस मधुमेह से बचाव का कारगर हथियार है। हृदय रोग से बचाव के साथ महिलाओं के कई रोगों में भी यह सहायक माना जाता है। मानसिक रोगियों के लिए इसका अर्क अत्यंत लाभकारी होता है। बुरांश के जूस की मार्र्केटिंग करने वाले उद्यमी महेश चौड़ाकोटी का कहना है कि बुरांश का जूस सिर्फ पहाड़ में ही नहीं, बल्कि मैदानी क्षेत्रों में भी काफी लोकप्रिय होता जा रहा है।
बुरांश वृक्ष का मुख्य आकर्षण इसके फूल होते हैं, जो मुख्य रूप से लाल रंग के होते हैं। इसकी कुछ प्रजातियों में गुलाबी तथा सफेद छींटदार पुष्प भी लगते हैं। ये फूल गुच्छों के रूप में खिलते हैं। फूलों की लंबाई दो इंच तक होती है। बुरांश का अचार भी बनता है, मगर मुख्य रूप से इसका जूस ही खासा लोकप्रिय है। उद्यमी देवेंद्र ओली के अनुसार यह जूस अपनी विशेषताओं के कारण शीतल पेय का विकल्प बन रहा है। वह कहते हैं कि सिर्फ 40 रुपये लीटर कीमत वाला जूस स्वाद और सेहत दोनों ही लिहाज से काफी लाभदायक है।
अनियंत्रित विदोहन से उजड़ने का खतरा
चंपावत। अनियंत्रित विदोहन के कारण प्रकृति के यौवन को उन्मादी बनाने वाला बुरांश का वृक्ष अब खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। अपने बहुपयोगी गुणों के कारण जहां वनों में इसका विदोहन लगातार बढ़ रहा है, वहीं अनियंत्रित कटान तथा आग से भी बुरांश वृक्ष की प्रजाति के उजड़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर वन विभाग के पास बुरांश के विदोहन को रोकने की कोई कार्ययोजना ही नहीं है।
पड़ोसी देश नेपाल का राष्ट्रीय पुष्प है बुरांश
चंपावत। बुरांश हिमालयी जंगलों की शान तो है ही, मगर यह पड़ोसी राष्ट्र नेपाल का राष्ट्रीय पुष्प भी है। लाली बुरांश नाम से यह नेपाल का राष्ट्रीय पुष्प है। यही नहीं उत्तराखंड शिक्षा परिषद की ओर से बुरांश को अपने विभिन्न पाठ्यक्रमों में भी शामिल किया गया है।