टनकपुर। सेना में भर्ती के नाम पर ठगी में पिथौरागढ़ भर्ती कार्यालय के सैन्य अफसरों की लिप्तता के संकेत से खासा हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस की छानबीन में गिरोह के बारे में चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। भर्ती के नाम पर ठगी करने वाला यह गिरोह 2009 से सक्रिय है तथा करीब दो दर्जन युवकों से भर्ती कराने के नाम पर करीब 42 लाख रुपये ऐंठ चुका है। बहरहाल आरोपी सैन्य अफसरों की लिप्तता के बारे में पुलिस पीड़ितों से पूछताछ कर तथ्य जुटा रही है।
भर्ती के नाम पर बेरोजगार युवकों से ठगी के आरोप में बनबसा सैनिक छावनी के आफीसर्स मैस इंचार्ज नारायण सिंह मेहता की गिरफ्तारी से उजागर हुए मामले की जांच में गिरोह की करतूतों का चिट्ठा खुलता जा रहा है। मामले की जांच कर रहे बनबसा के थानाध्यक्ष राम सिंह मेहता के मुताबिक यह गिरोह 2009 से सक्रिय था। इसमें पिथौरागढ़ भर्ती कार्यालय के कुछ सैन्य अधिकारियों की लिप्तता भी सामने आ रही है। पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी नारायण सिंह के मोबाइल की डिटेल में इस बात की पुष्टि हुई है कि भर्ती कार्यालय के एक सैन्य अधिकारी की अक्सर आरोपी नारायण सिंह से फोन पर बात होती थी। थानाध्यक्ष ने बताया कि तीन साल से सक्रिय यह गिरोह दो दर्जन बेरोजगार नौजवानों को अपने झांसे में लेकर करीब 42 लाख रुपये ऐंठ चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि ठगी के शिकार कई युवकों से रुपये ऐंठने के बाद उनका न सिर्फ पिथौरागढ़ भर्ती कार्यालय में बकायदा मेडिकल कराया गया बल्कि भर्ती के फर्जी अभिलेख थमा कर रुड़की एवं बंगलुरू ट्रेनिंग सेंटर भी भेजा गया, जहां से उन्हें फटकार खाकर निराश लौटना पड़ा था। थानाध्यक्ष ने बताया कि जांच में यह बात भी सामने आई है कि रुपये वापस मांगने पर आरोपी तथा संलिप्त सैन्य अधिकारी उन पर भी रिश्वत देने की कार्रवाई करने की बात कह कर धमका रहे थे। भविष्य बर्बाद होने के डर से पीड़ित भी अब तक अपना मुंह बंद किए थे। उन्होंने बताया कि फिलहाल पीड़ितों से गहन पूछताछ कर तथ्य जुटाए जा रहे हैं।