पिथौरागढ़। जवाहर नवोदय विद्यालय भवन की राह में रोड़े कम नहीं हैं। कभी पेयजल विलेन बना तो अब भवन निर्माण की फीनिशिंग के लिए धन का रिलीज नहीं होना। इन सबके चलते विद्यालय अपने भवन में शिफ्ट नहीं हो पा रहा है। और इस कारण हाईस्कूल से आगे की कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय का संचालन इस जिले में 2004 से हो रहा है। पर इसका संचालन अपने भवन में नहीं बल्कि जीआईसी के चंद कमरों में हो रहा है। नवोदय विद्यालय का भवन यहां से दस किलोमीटर दूर आठगांव सीलिंग में निर्माणाधीन है। विद्यालय भवन का प्रथम फेज पूरा होने को था। मगर अब धन के रिलीज होने में देरी अड़ंगा बन रही है।
कार्यदाई संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक आईआर माकड़ का कहना है कि भवन का एक फेज तकरीबन पूरा हो गया। सिर्फ फीनिश्ंिाग का कार्य रह गया। जिसमें आंतरिक मार्ग, चहारदीवारी एवं नाले को कवर करने का काम शामिल है। मगर इसके लिए यहां से भेजा गया 90 लाख रुपये का प्रस्ताव अभी स्वीकृत नहीं हुआ है। जिस वजह से फीनिशिंग का काम नहीं हो पा रहा है। वैसे पहले रोड़ा बन रहे पेयजल व्यवस्था का समाधान खोज लिया गया है और पेयजल लाइन बिछाने का काम करीब पूरा कर लिया गया है।
अपना भवन नहीं होने का खामियाजा यहां शिक्षण कार्य पर पड़ रहा है। हाईस्कूल से आगे की पढ़ाई इस स्कूल में नहीं हो पा रही है। और छात्र-छात्राओं को इसके लिए दूसरी जगह दौड़ लगानी पड़ रही है। इस बार हाईस्कूल पास करने के बाद यहां के 19 बच्चे चमोली और नैनीताल में दाखिला लेने को मजबूर हुए। जवाहर नवोदय विद्यालय की प्राचार्या अनीता कुमारी का कहना है कि जगह की कमी से विद्यालय संचालन में दिक्कत आना स्वाभाविक है। इस वजह से दसवीं तक की कक्षाएं ही यहां चल पा रही हैं। इस वक्त कुल 149 छात्र-छात्राएं इसमें पढ़ रहे हैं। दसवीं के बाद के छात्र-छात्राओं को दूसरे नवोदय विद्यालय में भेजा गया है।