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रख यकीं खुद पे ऐ मुसाफिर...

Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
Champawat
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लोहाघाट। खेतीखान में आयोजित कवि सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के जरिए दिल की वेदना को उजागर किया। जीआईसी खेतीखान के प्रधानाचार्य डीएल वर्मा की अध्यक्षता एवं रघुराज देउपा के संचालन में शिक्षाविद सीएल वर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर गोष्ठी की शुरुआत की। विजय सुतेड़ी ने रख यकीं खुद पे ऐ मुसाफिर, ये सांस जब तक चल रहा, ना कर गुमां ना कर तू गम किसकी कमी खल रहा, कविता प्रस्तुत की। वहीं मुकेश देउपा ने आज आए कोई शायद, दरवाजा खुला रखना तथा मनीषा माहरा ने यहां खाने को मिलता क्या है, यहां का खाना देखकर सारा विश्व हिलता है। नरेश जुकरिया ने गुल खिले गुलदार खिले और खिले गुलदस्ते कविता प्रस्तुत की।
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आचार्य रेवाधर बिनवाल ने राम राज्य विधायक आवास में, पूजा ओली ने विज्ञान देन है भगवान की, हिमांशु बोहरा ने भ्रष्टाचार पर कटाक्ष किए। वहीं डा. बीडी भट्ट ने देव स्थल है रक्त रंजित, निरीह प्राणियों की होती है बलि कविता सुनाई, आरती ओली ने खुश रहो जीवन में, प्रियंका गड़कोटी में छोटी उम्र में बना दिया बालिका वधु, नीरज कर्नाटक ने भी भ्रष्टाचार पर प्रहार किए। आशीष ओली ने विज्ञान एक वरदान है, हमें करनी है पहचान पर कविता पेश की। इसके अलावा मोहित ओली, अजय भट्ट, हरी राम टम्टा ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं। आयोजन समिति की ओर से डा. एलडी ओली, देवकी खर्कवाल, सुरेंद्र देउपा, सुरेंद्र बोहरा, गोपाल मनराल, कैलाश सेलिया, मुकेश कर्नाटक, प्रधानाचार्य गिरीश सोराड़ी, हिमेश कलखुडिया, सुशीला बोहरा ने सभी का आभार जताया।
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