चंपावत। नगर निकाय चुनाव में पार्षद बनने के लिए जोर लगा रहे कई प्रत्याशियों की निगाह विधानसभा पर भी है। कांग्रेस के पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल तो पार्षद रहते हुए ही विधायक बने थे। इस बार के नगर निकाय चुनाव में दो ऐसे प्रत्याशी मैदान में हैं, जो पूर्व में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।
दो नगर पालिका और दो नगर पंचायत वाले चंपावत जिले में अध्यक्ष पद के लिए कुल 25 उम्मीदवार मैदान में हैं। महिला आरक्षित बनबसा नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए कुल आधा दर्जन प्रत्याशी हैं। इनमें से भाजपा की उम्मीदवार विमला सजवान 2002 विधानसभा में कांग्रेस की बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुकी हैं। जहां उन्होंने जोरदार टक्कर दी थी। विमला सजवान दो बार ग्राम प्रधान और एक बार जिला पंचायत सदस्य भी रह चुकी हैं। वहीं लोहाघाट के अध्यक्ष पद के एक निर्दलीय प्रत्याशी एडवोकेट विपिन पुनेठा भी 2002 में समाजवादी पार्टी से राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।
सभासद से शुरू हुआ था वित्त मंत्री पंत का सियासी सफर
प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत का सियासी सफर भी पिथौरागढ़ नगर पालिका के सभासद से शुरू हुआ था। वे 1988 में सभासद बने थे और बाद में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के निकाय कोटे से सदस्य चुने गए। इसके बाद उत्तराखंड राज्य बनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष से लेकर मंत्री तक बने। सिर्फ वित्त मंत्री प्रकाश पंत ही नहीं, पौड़ी नगर पालिका अध्यक्ष रहे यशपाल बेनाम से लेकर रुद्रपुर नगर पालिका के अध्यक्ष रह चुके राजकुमार ठकुराल ने भी नगर निकाय से ही राजनीतिक ऊंचाई हासिल की है।