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सरकार! खाली कुर्सियां इलाज कैसे देंगी

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चंपावत। उच्च न्यायालय ने आम आदमी को स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तीन माह (मार्च तक) के भीतर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के आदेश दिए हैं। वहीं, जिले में तैनात किए जाने के बावजूद कई विशेषज्ञ डॉक्टर लंबे समय से अवकाश में हैं। वहीं, कई पद रिक्त हैं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती में विसंगति भी है।
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जिले में डॉक्टरों के कुल 94 सृजित पद हैं, लेकिन तैनाती महज 43 की है। इसमें भी कुल डॉक्टरों में से 33 विशेष डॉक्टरों के पद सृजित हैं पर तैनाती महज 14 की है। 19 विशेषज्ञ डॉक्टर के पद खाली हैं।

जिले में एक भी कॉर्डियोलोजिस्ट, न्यूरोसर्जन, ईएनटी, यूरोलॉजिस्ट और प्लास्टिक सर्जन नहीं है। वहीं एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ टनकपुर में और फिजीशियन एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ चंपावत में तैनात हैं। यहां बता दें कि जिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ लंबे समय से छुट्टी पर हैं।
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सीएमएस डॉ. आरके जोशी ने बताया कि इकलौते फिजीशियन डॉ. एमके सैनी का अगस्त में ऋषिकेश तबादला हो चुका है। उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है, लेकिन स्थानांतरण आदेश के बाद से वे चिकित्सा अवकाश में हैं। लोहाघाट की निश्चेतक डॉ. अभिलाषा कोहली भी जुलाई में कार्यभार लेने के बाद से छुट्टी में हैं।

खाली कुर्सियां ही नहीं, कई विसंगतियां भी सिरदर्द बनी हुई है। जिले के अकेले निश्चेतक डॉ. हेमंत शर्मा टनकपुर में तैनात हैं, लेकिन वहां सर्जन नहीं हैं। इसके अलावा चंपावत और लोहाघाट में सर्जन हैं, लेकिन इन दोनों अस्पतालों में निश्चेतक नहीं हैं।

रेडियोलॉजिस्ट पर पिथौरागढ़ का जिम्मा भी

जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एचसी त्रिपाठी को पिथौरागढ़ का भी दायित्व दिया गया है। सीएमओ डॉ. आरके जोशी ने बताया कि मंडलीय स्वास्थ्य निदेशक के आदेश के तहत रेडियोलॉजिस्ट डॉ. त्रिपाठी हर सप्ताह दो दिन पिथौरागढ़ संबद्ध रहेंगे। उन्हें एक दिन पिथौरागढ़ जिला अस्पताल और एक दिन महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने के आदेश दिए गए हैं।

दो संविदा डॉक्टर नदारद

लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दो संविदा डॉक्टर पहली दिसंबर से गायब हैं। डॉ. चित्रलेखा और डॉ. वर्षा रानी 30 नवंबर के बाद से अस्पताल नहीं पहुंची हैं।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अनुपस्थित डॉक्टरों की सूचना उच्चाधिकारियों को देने के साथ ही जरूरी कार्यवाही की जाएगी। वहीं, टनकपुर का संयुक्त अस्पताल चिकित्साधीक्षक सहित 15 डॉक्टरों के सापेक्ष महज 4 डॉक्टरों से मरीजों की नब्ज टटोलने को मजबूर है।


विशेषज्ञ डॉक्टरों के बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से मरीजों को जरूरी इलाज नहीं मिल पा रहा है। अधिकतर मामले रेफर करने पड़ते हैं। वहीं लंबे समय से गैर हाजिर डॉक्टरों की सूचना निदेशालय भेजने के साथ ही जरूरी कार्यवाही की जाएगी। टनकपुर के निश्चेतक को हर बुधवार को चंपावत में सेवा देने के आदेश दिए गए हैं।
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- डॉ. एमएस बोरा, मुख्य चिकित्साधीक्षक, चंपावत।
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