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कल से शुरू होगा नगरूघाट मेला, तैयारियां पूरी

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लोहाघाट (चंपावत)। महाकाली नदी तट से लगे सीमापवर्ती गांवों में दो दिनी नगरूघाट मेले की तैयारियां शुरू हो गयी हैं। तीन नवंबर की रात से शुरू होने वाले मेले के लिए आसपास के गांवों के लोगों ने अपने पारंपरिक वाद्य यंत्र दमॉऊ को कसने और बजाने का काम शुरू कर दिया है। मेले में विभिन्न गांवों के दमाऊ की थाप देखने लायक होती है। मेले में बगोटी, सल्टा, जमरसों गांवों के देवरथ और पाशम, डुंगरा लेटी, सुनकुरी, सुल्ला, मजपीपल, देवकुंडा आदि गांवों की शोभा यात्राएं विशेष आकर्षण केंद्र होंगी।

बगोटी, सल्टा और जमरसों गांवों में नागार्जुन देवता के भंवर रूप अवतरित होकर भक्तों के कंधों पर सवार होकर नगरूघाट धाम पहुंचते हैं। यहां पर देवरथों और शोभा यात्राओं से प्राचीन मंदिर की परिक्रमा की जाती है। नागार्जुन देवता को महाकाली नदी का भंवर माना जाता है। इनका निवास महाकाली के तालाब के भीतर स्थित मंदिर में माना जाता है। डॉ.सतीश पांडेय बताते हैं कि महाभारत कालीन इस देवता का अंश भारत व नेपाल के आसपास के तमाम गांवों में विस्तारित हैं। हर वर्ष बैकुंठ चतुर्दशी को यहां से लगे भारत और नेपाल सीमा के लोग इस मेले में शामिल होते हैं। वैसे तो यहां के गांवों में हरिबोधिनी एकादशी से ही यह मेला शुरू हो जाता है। गांवों में देव गद्दी, झोड़े झुमटों का गायन शुरू हो जाता है।
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मेले को भव्य रूप देने के लिए ग्रामीणों की ओर से तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। रात का मेला होने एवं भारत-नेपाल सीमा के मद्देनजर क्षेत्र पंचायत सदस्य बहादुर चंद, विक्रम सामंत, रमेश चंद, कमल बोहरा, अनिल पांडेय, मोहन पांडेय, गणेश बोहरा, हरि सिंह नलवा, जगदीश पांडेय, खष्टी बल्लभ पांडेय, देव सिंह, प्रवीण पांडेय, सुभाष राम, देवी चंद, मोहन पांडेय, पुष्कर बोहरा, गंगादत्त पांडेय, दिनेश शास्त्री आदि ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।
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