चंपावत।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल ने एक साल पहले तीन वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म और जान से मारने के प्रयास में दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के साथ ही लैगिंग अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) 2012 के तहत अपराध सिद्ध पाते हुए दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है। जुर्माना न देने पर आरोपी को तीन माह कारावास की सजा और भुगतनी होगी।
18 जून 2016 को जिले के एक गांव में बरेली से एक परिवार पूजा-अर्चना के लिए आया था। जब गांव के मंदिर में पूजा का कार्यक्रम चल रहा था, इसी बीच बरेली से आए परिवार की तीन वर्षीय बालिका रहस्यमय ढंग से लापता हो गई। बालिका की खोजबीन की गई तो वह मंदिर से थोड़ी दूर झाड़ियों में लहूलुहान हालात में बेहोश मिली तथा पास में ही आरोपी शिवदत्त खर्कवाल निवासी बिसराड़ी बाराकोट को आपत्तिजनक स्थिति में दबोच लिया गया। बालिका के परिजनों की ओर से आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 307, 376 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत लोहाघाट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
मामले की सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को आईपीसी की धारा 307 के तहत सात साल, धारा 376 के तहत दस साल सश्रम कारावास और पॉक्सो एक्ट के तहत दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो विद्याधर जोशी ने पैरवी की।