चंपावत। राष्ट्रीय पशु गणना के अंतर्गत बुधवार से चंपावत जिले में पशु गणना शुरू हो गई है। जिले में 25 प्रगणक पशुओं की गिनती कर रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी ने बताया कि पशुओं की गिनती तीन महीने में पूरी कर ली जाएगी। पहली बार पशु गणना हाई-टेक तरीके से की जा रही है।
इस बार प्रगणक टैबलेट के माध्यम से ऑनलाइल पशु गणना कर रहे हैं। टैबलेट में एक खास तरह का सॉफ्टवेयर डाउनलोड किया गया है जो मोबाइल नेटवर्क से कटे इलाकों में भी गिनती का काम सुचारु रूप से कर सकेगा। पशु गणना की स्क्रूटनी (जांच) के लिए उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके पाठक को नोडल अधिकारी बनाया गया है। साथ ही प्रगणकों के काम पर नजर रखने के लिए पांच सुपरवाइजरों की भी तैनाती की गई है।
पांच साल में कम हो गए 21 फीसदी मवेशी
चंपावत। चंपावत जिले में पशु संपदा की तस्वीर क्या है इसका खुलासा 2019 में होगा लेकिन पूर्व में हुई गणना बताती है कि पशुओं की संख्या में लगातार कमी आ रही है। मवेशियों के साथ ही पशुपालक घट गए हैं। गौ वंशीय पशुओं से लेकर तमाम तरह के पशुओं में पांच वर्ष में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी आ चुकी है।
जिले की 2.65 लाख की आबादी में 1.34 लाख पशुपालक हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार 2012 की पशु गणना के मुताबिक चंपावत जिले में कुल 1.67 लाख मवेशी हैं जबकि पांच साल पूर्व ये संख्या 2.12 लाख थी। महज पांच वर्ष में पशुधन की संख्या में 21.33 प्रतिशत की कमी आ गई है। जिले में गौ वंशीय पशुओं की स्थिति भी ठीक नहीं है। इसमें पांच साल में 14.93 प्रतिशत कमी आई है। 2007 में गौ वंशीय पशु 107640 थे जबकि 2012 में ये संख्या घटकर 91559 रह गई है।
पशुपालकों का कहना है कि चारागाह की जगह में लगातार कमी आ रही है। पूर्व में इस श्रेणी की काफी जमीन सरकारी कार्यों के लिए भी अधिग्रहीत की जा चुकी है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी एनबी बचखेती ने बताया कि जिले में इस वक्त महज 7.14 प्रतिशत (16652 हेक्टेयर) जमीन चारागाह श्रेणी की है जबकि राज्य बनने से पूर्व इस श्रेणी की जमीन 29 हजार हेक्टेयर से अधिक थी।
चंपावत जिले में पशुओं की संख्या
पशु वर्ष 2012 वर्ष 2007
गौवंशीय 91559 107640
महिष वंशीय 23132 37573
बकरी 50919 65136
भेड़ 08 57
सुअर 299 213
कुल पशुधन 167034 212348
पशुओं की संख्या में कमी की मुख्य वजह जंगली जानवरों की वजह से कम हो रही खेती है। खेती में गिरावट का असर पशुपालन पर भी पड़ रहा है। गांवों के शहरीकरण से लेकर गौचर-पनघट की जमीन में हो रही कमी भी इसकी वजह है।
- डॉ. बीएस जंगपांगी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चंपावत।
11 पशु सेवा केंद्रों में पशुधन अधिकारी नहीं
चंपावत। खेती के बाद सबसे ज्यादा लोग पशुपालन पर आश्रित हैं मगर जिले में न पशुपालकों के हाल अच्छे हैं और न ही विभाग के। दूध के अलावा खेती में मददगार पशुओं की देखरेख की कायदे की व्यवस्था नहीं है। इसी तरह विभागीय ढांचा दुरुस्त है। 15 पशु अस्पताल हैं, इनमें इजड़ा अस्पताल डॉक्टर विहीन है। जिले के 11 पशु सेवा केंद्रों में पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं है। पशु सेवा केंद्र दूरदराज के इलाकों में मवेशियों के इलाज और सलाह में अहम भूमिका अदा करते हैं।