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चंपावत में शुरू हुई चाय पतियों की प्रोसेसिंग

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चंपावत। चंपावत की टी फैक्ट्री में अप्रैल से चाय तैयार करना शुरू कर दिया गया है। इस बार 45 हजार किलो पत्तियों को प्रोसेस कर तैयार किया जाएगा। इसके लिए पत्तियों की ग्रेडिंग शुरू कर दी गई है। ये काम अक्तूबर के अंत तक जारी रहेगा।
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टी फैक्ट्री के प्रभारी रूनी बताते हैं कि फैक्ट्री में सबसे पहले विदरिंग ट्रफ मेें चाय की हरी पत्ती को पंखे के जरिए सुखाया जाता है। फिर रोलिंग मशीन से इसकी मढ़ाई होती है।

ड्रायर मशीन से इसे हीट देकर सुखाया जाता है। आखिर में इसकी ग्रेडिंग होती है। पिछले साल 45783 किलो हरी पत्ती चाय पैदा हुई। प्रोसेसिंग के बाद 10559 किलो चाय तैयार हुई। यहां तैयार चाय में किसी भी तरह के केमिकल, टेनिन या कलर (सीटीसी) का प्रयोग नहीं किया गया है। बागान से लेकर फैक्ट्री में प्रोसेसिंग तक चाय जैविक है। इस आर्थोडोक्स ब्लैक लीफ टी को उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसी ने प्रमाणित भी किया है।
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उत्तराखंड टी बोर्ड की चंपावत इकाई के प्रबंधक डेसमंड का कहना है कि चंपावत की जैविक चाय में कई खूबियां है। ताजगी देने वाली यह चाय नुकसान नहीं करती है। एंटी आक्सीडेंट होने की वजह से शारीरिक क्षमता की गिरावट की गति को भी कम करता है। छीड़ापानी, सिलिंगटाक, च्यूराखर्क, मुड़ियानी, लमाई, चौकी, भगाना भंडारी, लधौन, मौराड़ी, नरसिंह डांडा, गड़कोट, चौड़ा, मझेड़ा, मंच, खूना, बलाई, डिंगडई आदि के 203.40 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय के बागान हैं।

पहचान के साथ रोजगार दे रही चाय
यहां की चाय बेहतरीन स्वाद के साथ जैविक होने के चलते सेहतमंद भी है। कोलकाता चाय बोर्ड की नीलामी के जरिये यह चाय दुनिया के कई देशों तक अपनी खुशबू बिखेर रही है। इस चाय से चंपावत जिले को पहचान और 300 से अधिक लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। 2013 में चाय फैक्ट्री लगने के बाद 2014 से यहां की चाय नियमित रूप से कोलकाता में होने वाली नीलामी में हिस्सा ले रही है।
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