चंपावत। जिले में इस बार काश्तकारों को बीज के आलू के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। उद्यान विभाग ने आलू के प्रमाणिक बीज का भंडारण कर लिया है। 250 कुंतल बीज का आलू पिथौरागढ़ जिले के मदकोट से यहां पहुंच चुका है। उद्यान सचल केंद्रों के माध्यम से काश्तकारों को यह एक हफ्ते के भीतर उपलब्ध करा दिया जाएगा।
आलू के उत्पादन को लेकर चंपावत जिले का खूब नाम है। आलू यहां की मुख्य नकदी फसलों में है। जिले के पहाड़ी हिस्से में आलू की फसल बड़े पैमाने पर होती है। पांच हजार फीट से अधिक ऊंचाई के चलते यहां के आलू का स्वाद भी खास है। जिले में पिछले साल 1100 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती हुई। जिसमें 11673 मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ।
जिला उद्यान अधिकारी एनके आर्या ने बताया कि 350 कुंतल बीज के आलू की मांग की गई है। इसमें से 250 कुंतल बीज का आलू आ चुका है। इसकी बिक्री चंपावत के अलावा देवीधुरा व लोहाघाट सचल केंद्रों के जरिए की जाएगी। 50 प्रतिशत अनुदान पर मिलने वाले इस बीज के लिए काश्तकार को प्रति किलोग्राम 16.25 रुपये देने होंगे। किसानों को पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर यह बीज का आलू दिया जाएगा। आमतौर पर वक्त पर बीज नहीं मिलने से काश्तकारों को अधिक कीमत पर खुले बाजार से बीज की खरीद करनी पड़ती थी।
आलू की खेती पर भारी पड़ रहे हैं जंगली जानवर
चंपावत जिले में आलू की फसल काश्तकारों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। लेकिन पिछले तीन सालों से इस नकदी फसल के प्रति कृषकों का रुझान घटा है। इसकी मुख्य वजह जंगली सुअरों का आतंक है। बीते एक दशक से सुअरों ने काश्तकारों को बुरी तरह मायूस किया है। किसानों का कहना है कि खेतों में बोए गए आलू के बीजों को जंगली सुअर मटियामेट कर रहे हैं। इसके अलावा बारिश की कमी से भी किसान प्रभावित हुए हैं।
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तीन वर्ष में आलू की खेती
वर्ष खेती का रकवा (हेक्टेयर में) उत्पादन (मीट्रिक टन में)
2015 2515 42757
2016 1100 11617
2017 1100 11673
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एक हफ्ते में मिलेंगे कई अन्य सब्जियों के बीज
जिले में आलू के अलावा कुछ अन्य सब्जियों के बीज भी एक हफ्ते में मिलने लगेंगे। उद्यान विभाग ने बताया कि टमाटर, शिमला मिर्च, बंद गोभी, फूल गोभी और मूली के बीज भी यहां सोमवार तक पहुंच जाएंगे। रियायती दर पर किसानों को ये बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।