नेपाल सीमा से लगे टनकपुर-जौलजीबी (टीजे) मोटर मार्ग के पहले चरण के काम में लेटतीफी पर कार्यदायी संस्था परियोजना क्रियान्वयन यूनिट (पीआईयू) ने काम करा रही कंपनी आरजीबीएल पर 67 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना कार्य की कुल लागत का एक प्रतिशत है जिसे कंपनी को होने वाले भुगतान से काटा जाएगा। इस कार्य की कुल लागत 67 करोड़ रुपये है।
पीआईयू के अधिशासी अभियंता राजेश पुनेठा ने बताया कि टीजे मोटर मार्ग के 17.875 किमी के पहले चरण में ठुलीगाड़ से चूका तक का काम जून 2018 में पूरा होना था। पेड़ों के कटान मेें हुई देरी के चलते कंपनी को छह माह का अतिरिक्त समय दिया गया। काम को पूरा करने का यह समय भी दिसंबर 2018 में पूरा हो गया।
अनुबंध की शर्तों के मुताबिक काम करा रही कंपनी आरजीबीएल को किए जाने वाले कुल भुगतान का एक प्रतिशत पेनाल्टी के रूप में काटा जाएगा। ठुलीगाड़ से चूका तक के मोटर मार्ग में कटिंग का काम तकरीबन पूरा कर लिया गया है। ज्यादातर कलवर्ट भी बनाए जा चुके हैं लेकिन अभी लादीगाड़, भवानी नाली और गौजी नाली में छोटे पुल बनने हैं। साथ ही डामरीकरण का काम किया जाना है।
पीआईयू फिर से हाईकोर्ट में दायर करेगा याचिका
अगस्त 2017 से बंद है चूका से रूपालीगाड़ तक का काम
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे टनकपुर-जौलजीबी (टीजे) मोटर मार्ग के दूसरे पैकेज चूका से रूपालीगाड़ का काम विवाद के चलते 25 अगस्त 2017 से बंद है। देहरादून की जिला अदालत की ओर से दोबारा टेंडर पर रोक लगाई गई है। जिला अदालत के इस फैसले के खिलाफ कार्यदायी संस्था परियोजना क्रियान्वयन यूनिट (पीआईयू) की उच्च न्यायालय में दायर याचिका मार्च में खारिज हो चुकी है।
कार्यदायी संस्था जल्द ही दोबारा अरजेंसी याचिका दायर करेगा। पीआईयू के अधिशासी अभियंता राजेश पुनेठा का कहना है कि 8 मार्च को उच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज की गई थी। सीमावर्ती क्षेत्र की बेहद महत्वपूर्ण सड़क होने के चलते रिटेंडरिंग के लिए दोबारा याचिका दायर की जाएगी।
131 किलोमीटर लंबे टीजे मोटर मार्ग में पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र की स्थिति साफ होने तक टनकपुर से रूपालीगाड़ तक 55 किमी का कार्य होना है। टनकपुर से ठुलीगाड़ तक का काम पहले ही पूरा हो चुका है। ठुलीगाड़ से चूका तक के पहले पैकेज का काम चल रहा है। मगर चूका से रूपालीगाड़ तक के 24.40 किमी के 123 करोड़ रुपये की लागत के दूसरे पैकेज का काम निविदा संबंधी विवाद के चलते लटका है। अगस्त 2017 में निविदा को निरस्त तो कर दिया गया था, मगर नई निविदा पर देहरादून की जिला अदालत ने रोक लगाई है। इस वजह से आगे का काम शुरू नहीं हो सका।