सप्तेश्वर लघु जल बिजली परियोजना में काम करते अभियंता।
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चंपावत। करीब एक दशक तक बंद रही सप्तेश्वर लघु जल बिजली परियोजना का नवीनीकरण और मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 7 नवंबर को कई अन्य योजनाओं के साथ इसका लोकार्पण किया था, लेकिन 64.93 लाख रुपये की यह परियोजना दो दिन में ही ठप हो गई। केबल फुंकने से परियोजना ने काम करना बंद कर दिया।
सिप्टी क्षेत्र में 1990 में सप्तेश्वर में 300 किलोवाट क्षमता की लघु बिजली परियोजना शुरू की गई थी, लेकिन 2010 में उपकरण खराब होने के बाद से यह परियोजना बंद थी। नवीनीकरण और मरम्मत कार्य के बाद उरेडा ने इस बिजली परियोजना को शुरू किया। इससे ग्रामीण क्षेत्र के एक फीडर को बिजली की भरपाई होने के अलावा चार लोगों को रोजगार भी दिया जाना है। यहां उत्पादित बिजली ऊर्जा निगम को दी जानी थी, लेकिन दो दिन बाद ही इस परियोजना ने काम करना बंद कर दिया।
ऊर्जा निगम के जेई आरसी पंत ने बताया कि परियोजना में केबल फुंकने से निगम को बिजली नहीं मिल पा रही है।
सप्तेश्वर लघु जल बिजली परियोजना की केबल नमी के चलते फुंक गई। पावर हाउस से ट्रांसफार्मर तक की 20 मीटर केबल फुंक गई। नई केबल मंगाई जा चुकी है। जल्द ही केबल लगा दी जाएगी। एक सप्ताह के भीतर 150 किलोवाट के दो जनरेटर से ग्रिड में बिजली आपूर्ति शुरू हो जाएगी। - एमएस जंगपांगी, अभियंता, उरेडा, चंपावत।