चंपावत। आम लोगों का कहना है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता होनी चाहिए तभी राजनीति की गंदगी को साफ किया जा सकेगा। अभी तक चुनावी बांड के जरिए मिलनी वाली धनराशि का ब्योरा राजनीतिक दल नहीं देते हैं। कितना चंदा मिला और किसने दिया इस बात को कोई नहीं जान पाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राजनीतिक दलों को चुनावी बांड से मिली रकम का ब्योरा 30 मई तक चुनाव आयोग को देने के आदेश दिए हैं। लोगों ने कहा कि लोकतंत्र को पारदर्शी बनाने के लिए चंदे और चुनाव में होने वाले खर्च में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
राजनीतिक दल लोकतंत्र की धुरी हैं। उन्हें चुनाव से लेकर तमाम कार्यक्रमों के लिए धन चाहिए लेकिन चंदे के रूप में मिलने वाले धन में पारदर्शिता जरूरी है। इससे न केवल दल जवाबदेह बनेंगे बल्कि लोगों में भरोसा भी बढ़ेगा।
हरीश पांडेय पूर्व जिला महामंत्री, भाजपा।
राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का ब्योरा न केवल पारदर्शी हो बल्कि इसकी जानकारी आम लोगों को भी दी जानी चाहिए। इससे राजनीतिक दल साफ-सुथरी सियासत के लिए प्रेरित होंगे और उन पर अंगुलियां भी नहीं उठेंगी।
भगवत सरण राय, कारोबारी, चंपावत।
चुनावी बांड से मिली रकम की जानकारी सार्वजनिक होने से लोकतंत्र ताकतवर होगा और राजनीतिक दलों पर गलत तरीके से चंदा नहीं लेने के लिए दबाव बनेगा। चंदे की पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
भगवत कलखुडिय़ा, व्यापारी, चंपावत।
जनवरी 2018 से शुरू इलेक्टोरल बांड की अवधारणा को लेकर ही विवाद था। इसके जरिए पारदर्शिता पर पहरा लगा दिया गया था। अब बांड से मिलने वाली रकम का ब्योरा देने के निर्देश से चंदे में पारदर्शिता आएगी।
डॉ. यशवंत बोरा, शिक्षक, चंपावत। (13 सीपीटी 16पी)