चंपावत। जिले को शहद उत्पादन के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रशासनिक कोशिश शुरू हो गई है। शहद उत्पादन के लिए जिले के विभिन्न विभागों की ओर से समन्वित प्रयास कर इसे स्वरोजगार का मुख्य जरिया बनाने का प्रयास किया जाएगा।
जिलाधिकारी सुरेंद्र नारायण पांडेय ने जिला विकास अधिकारी आरसी तिवारी और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक जर्नादन चिलकोटी को जिले के विभिन्न घाटी वाले क्षेत्रों में मौन पालन की संभावनाओं के लिए सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी के अनुसार सर्वे के बाद चयनित स्थानों में वहां के लोगों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कार्य में जलागम समेत उद्यान, खादी ग्रामोद्योग, कृषि आदि विभागों का समावेश किया जाएगा।
जिले के महाकाली, सरयू, पनार, लधिया, रतिया, क्वैराला, लोहावती आदि नदी घाटी क्षेत्रों में मौन पालन की अपार संभावनाएं और अनुकूल परिस्थितियां हैं। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक चिलकोटी का कहना है कि मौन पालन का प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को दस दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस दौरान उनके आवास और भोजन की पूरी व्यवस्था की जाएगी। विभिन्न स्थानों में यदि 25 युवक प्रशिक्षण के लिए तैयार होते है, तो स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।