लोकसभा चुनाव में जिले में बेशक पिछली बार से करीब डेढ़ प्रतिशत अधिक मतदान हुआ है लेकिन 321 बूथों में से छह बूथों में हुआ कम मतदान चिंता की लकीरों को गहरी करता है। इन छह बूथों में महज 2.73 प्रतिशत वोट पड़ा। लोगों अपनी समस्याओं के समाधान न होने पर चुनाव का बहिष्कार किया।
चंपावत जिले के रौकुंवर, रुइयां, मटकांडा, बकोड़ा, बस्टियागूंठ और कायल गांव के लोग अर्से से सड़क सहित विभिन्न बुनियादी समस्याओं के लिए आवाज उठा रहे हैं। चुनाव से पूर्व ग्रामीणों ने रोड और दूसरी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी थी। मगर प्रशासन ने उनके इस दर्द को समझने के बजाय हल्के में लिया। आखिरी वक्त तक ग्रामीणों की मान-मनौवल्ल की कोशिश की गई लेकिन शायद ग्रामीणों ने प्रशासन के चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद जरूरी कार्यवाही करने के आश्वासन को भरोसे लायक नहीं माना।
ग्रामीण सुरेश भट्ट, लक्ष्मीदत्त, जोगा राम सहित तमाम लोगों का कहना है कि प्रशासन और प्रतिनिधि उनके पीड़ा को नहीं समझ रहे हैं। ये बहिष्कार लोकतंत्र के प्रति आस्था की कमी नहीं बल्कि अपनी तकलीफ को प्रशासन के जरिए सरकार तक पहुंचाने का प्रयास था। ग्रामीण बताते हैं कि सड़क नहीं होने से यहां के लोगों को इमरजेंसी में इलाज के लिए डोली का सहारा लेना पड़ता है। इसके चलते बीते तीन वर्षों में सात से अधिक मौत ह चुकी हैं।
चुनाव में जिन बूथों में बेहद कम मतदान हुआ है, उन इलाकों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष पहल की जाएगी।
रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी।
चंपावत जिले के बेहद कम मतदान वाले छह बूथ
मतदान केंद्र कुल मतदाता डाले गए वोट
रौकुंवर: 371 02
कायल: 188 03
रुइयां: 517 04
मटकांडा: 160 04
बकोड़ा: 437 15
बस्टिया गूंठ: 267 25
कुल वोटर 1940 53