चंपावत। जिले के सरकारी, निजी अस्पतालों व पैथोलॉजी सेंटरों में रोजाना औसतन 30 किलो बायो मेडिकल वेस्ट निकलता है।
मगर इनके निस्तारण की कारगर व्यवस्था नहीं है। चंपावत जिला अस्पताल में जरूर व्यवस्था कुछ बेहतर है। यहां अस्पताल परिसर में बनाए तीन गड्ढों में इस मेडिकल कचरे का निवारण किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों की स्थिति ज्यादा खराब हैं।
अस्पताल से निकलने वाले अवशिष्ट का सही प्रकार से निस्तारण नहीं होने से संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.आरपी खंडूरी का कहना है कि बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा। निस्तारण को लेकर हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का अनुपालन कराया जाएगा।
मेडिकल कचरे को आग लगा नष्ट करते हैं
टनकपुर (चंपावत)। टनकपुर में बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था कुछ ठीकठाक है। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.एचएस हयांकी ने बताया कि मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए अस्पताल परिसर के पिछवाड़े में पुख्ता प्रबंध हैं। इन गड्ढों के कचरे से भरने पर आग लगा नष्ट किया जाता है।