चंपावत। हर गांव को जगमग करने के लिए विद्युतीकृत किया जा रहा है, मगर खामी होने पर इन गांवों में बत्ती बहाल करना आसान नहीं है। इसकी वजह विभागीय चूक नहीं, बल्कि लाइनमैन व फील्ड स्टाफ की जबर्दस्त कमी है। तल्लादेश क्षेत्र की 130 किमी लंबी लाइन की देखरेख का जिम्मा महज तीन कर्मियों पर है। मगर ऐसा हाल सिर्फ तल्लादेश का नहीं है, बल्कि पूरे चंपावत डिवीजन का है। समूचे डिवीजन में चार विभागीय लाइनमैनों के अलावा 17 लाइनमैन संविदा पर रखे गए हैं। यानी डिवीजन में एक लाइनमैन के पास औसतन 178 किमी लंबी लाइन का जिम्मा है।
अंधेरे को दूर कर रोशनी बिखेरने का जिम्मा संभालने वाले ऊर्जा निगम के हाल अजीबो-गरीब हैं। चंपावत में 2003 में उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) का डिवीजन खुलने के बाद से बिजली की लाइनों से लेकर उपभोक्ता तक में दो से तिगुना इजाफा हो चुका है। मगर विभाग के कारगर संचालन के लिए कर्मी नहीं बढ़ सके हैं। 11 केवी, 33 केवी व एलटी लाइनों को मिलाकर करीब 1800 किलोमीटर लाइन बीते 15 सालों में बढ़कर 3750 किलोमीटर से अधिक हो चुकी है। बिजली उपभोक्ता भी 18500 से बढ़कर 43465 हो गए हैं। डिवीजन खुलने के बाद से अब तक बिजली विभाग के उप संस्थान 3 के बजाय 7 (टनकपुर, बनबसा, चंपावत, लोहाघाट, खेतीखान, बाराकोट व देवीधुरा) हो गए हैं। लेकिन विभागीय लाइनमैन से लेकर तकनीकी कर्मी महज 19 हैं।
डिवीजन खुलते वक्त स्वीकृत पद 120 थे, लेकिन तैनाती महज 51 की है। जरूर काम चलाने के लिए उपनल, स्वयं सहायता समूह व आउटसोर्स से 111 अन्य कर्मियों को रखा गया है। मगर नए होने की वजह से कुशलता व अनुभव की कमी काम की गति पर असर डाल रही है। बिजली विभाग के कर्मचारी नेता सुरेश चंद्र पनेरू कहते हैं कि बिजली लाइन और अन्य आधारभूत ढांचे में बढ़ोत्तरी के बाद मानक के हिसाब से 340 कर्मचारी होने चाहिए। मगर उपनल, एसएचजी व आउटसोर्स से डिवीजन में रखे गए 111 कर्मियों को मिलाकर ये संख्या 162 है। कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजने के बाद भी कर्मियों की संख्या मेें इजाफा नहीं हो पा रहा है। इसका असर विभाग की कार्यक्षमता पर पड़ भी रहा है।
10 में से सिर्फ चार जेई
चंपावत डिवीजन में डेढ़ दशक में राजस्व हर माह 50 लाख से बढ़कर 1.60 करोड़ तक पहुंच गया है। मगर अभियंताओं की कुर्सी भी खाली है। लोहाघाट के सहायक अभियंता व एई राजस्व की अतिरिक्त जिम्मेदारी चंपावत के सहायक अभियंता विकास भारती को दी गई है। कनिष्ठ अभियंताओं की तस्वीर भी खराब है। 10 में से महज चार जेई ही तैनात हैं। चंपावत शहरी क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर आरसी पंत के पास नेपाल सीमा से लगे चंपावत ग्रामीण तक का दायित्व है।
कोट
डिवीजन में जरूरत के सापेक्ष लाइनमैन सहित अन्य कार्मिकों की काफी कमी है। इसके लिए कई बार पत्र भेजे गए हैं। इस वजह से मरम्मत कार्य से लेकर विभागीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है।
राजेश कुमार,
अधिशासी अभियंता,
यूपीसीएल, चंपावत डिवीजन।
वर्ष 11 केवी लाइन 33 केवी लाइन एलटी लाइन ट्रांसफार्मर उप संस्थान उपभोक्ता
2003 866.6 92 927.45 528 03 18500
2018 1661.49 165.87 2153.53 1305 07 43465