चंपावत। उत्तराखंड वन संसाधन (जायका) परियोजना के अंतर्गत भिंगराड़ा रेंज परिसर में जायका परियोजना के माइक्रोप्लान पर मंथन हुआ। उप प्रभागीय वनाधिकारी मनोहर सिंह सिमियां ने वन पंचायतों के सचिवों को परियोजना के निर्माण की बारीकियां बताईं। परियोजना के विपणन विशेषज्ञ चतुर सिंह व विनोद जोशी ने वन पंचायतों को प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) का प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने वन पंचायतों को आय संवर्द्धन व समूहों की जानकारी दी। वन क्षेत्राधिकारी रमेश चंद्र जोशी ने बताया कि जायका परियोजना के तहत जल संरक्षण सहित विभिन्न वानिकी कार्य कराए जाएंगे। ताकि वन पंचायतें आत्मनिर्भर हो सकें। इस मौके पर जायका सचिव पुष्कर भट्ट, जीत राम,नारायण राम, रघुवर सिंह भंडारी आदि मौजूद थे।
वनों को समृद्ध करने, चुगान रोकने, पेड़ों का छटान करने, चाल-खाल और चेकडैम व वनों को संरक्षित करने के मकसद से शुरू इस परियोजना के तहत जिले की 1210 वन पंचायतों में से 52 वन पंचायतों का चयन किया गया है। डीएफओ केएस बिष्ट ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत एक वन पंचायत में अधिकतम 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाएं जाएंगेे। इसके लिए वन व विभाग वन पंचायतों को नि:शुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा।