लमगड़ा से देवीधुरा के लिए बनाई गई 33 केवी क्षमता की लाइन तीन वर्षों से
ठप पड़ी है। इस लाइन से देवीधुरा तथा यहां के तीन दर्जन से अधिक गांव
लाभान्वित होते थे। जब पिथौरागढ़ से 33 केवी की लाइन खराब होने से लोहाघाट क्षेत्र की बिजली गुल होती थी तो इस लाइन से बिजली दी जाती थी। 2012 में भारी वर्षा के चलते यह लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
वर्ष 2006-07 में लगभग चार करोड़ रुपये लागत से बनाई गई इस लाइन को लावारिस अवस्था में छोड़ने के सवाल का विभाग के पास कोई जवाब नहीं है। जंगल से गुजरने वाली इस लाइन के कई स्थानों पर तार पेड़ों में लिपट गए हैं। वर्ष 2009 से 2012 तक लाइन के चालू रहने से देवीधुरा और यहां के गांवों को पर्याप्त वोल्टेज मिली, लेकिन इस लाइन के बंद होने से विद्युत व्यवस्था बनाए रखने का दूसरा विकल्प भी ठप पड़ गया।
हर हाल में चालू हो लाइन
लमगड़ा-देवीधुरा लाइन की स्वीकृति दिलाने वाले पूर्व ब्लाक प्रमुख लक्ष्मण सिंह लमगड़िया का कहना है कि इस लाइन को लावारिस छोड़कर क्षेत्रीय लोगों के साथ विभाग ने नाइंसाफी की है। लाइन को इतने लंबे समय तक क्यों और किन परिस्थितियों में बंद रखा गया, इसकी जांच की जानी चाहिए।
पूर्व में नहीं रहती थी समस्या
कनिष्ठ प्रमुख हयात सिंह बिष्ट का कहना है कि इस लाइन के चालू रहनेे से यहां विद्युत की कोई समस्या नहीं रहती थी। करोड़ों रुपये व्यय करने के बावजूद यदि इस लाइन से जनता को कोई लाभ नहीं है तो इसका निर्माण क्यों किया गया।
मरम्मत के लिए टेंडर आमंत्रित किए
अधिशासी अभियंता राजेश कुमार मौर्य का कहना है कि लाइन की मरम्मत के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। विभागीय प्रक्रिया के बाद लाइन में मरम्मत का कार्य शुरू कर उसे चालू करने का प्रयास किया जाएगा। बजट के अभाव में लाइनों की समय से मरम्मत न होने से उसमें प्रतिवर्ष नुकसान बढ़ता गया।