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33 किमी दूर हो रहा मंच उप तहसील का काम

Sat, 09 Dec 2017 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
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एक साल पूर्व मंच में इस स्थान पर खुली उप तहसील में जनवरी से ताला लटका है। - फोटो : अमर उजाला
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शनिवार को मंच उप तहसील बने एक साल पूरा हो गया, मगर 365 दिनों में इस उप तहसील के दरवाजे चार सप्ताह भी नहीं खुले। इस साल जनवरी से तो यहां लगातार ताला लटका रहा। इसकी वजह कर्मियों की कमी तो है ही, मगर सबसे ज्यादा दुश्वारी संचार नेटवर्क की दिक्कत है। मंच उप तहसील से संबंधित सभी कामकाज 33 किलोमीटर दूर चंपावत की तहसील से हो रहा है।
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नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश के मंच गांव में पिछले साल 9 दिसंबर को उप तहसील खुली। 56 राजस्व गांवों की करीब 11 हजार की आबादी वाली इस उप तहसील कार्यालय को मंच से करीब दो किमी दूर दुबड़ के पंचायतघर में बनाया गया। लेकिन लोगों की सुविधाओं के लिए बनी यह उप तहसील खुद लोगों के लिए मुसीबत बन रही है। इस उप तहसील से स्थाई निवास, चरित्र, आय, जाति सहित किसी भी तरह का कोई भी प्रमाणपत्र नहीं बन सका है। उप तहसील खुलने के बाद से भी सभी प्रमाणपत्र चंपावत तहसील कार्यालय से बन रहे हैं।

शुरू में चंपावत से एक नायब तहसीलदार को भेजा गया था, लेकिन जनवरी के शुरू में ही उन्हें चंपावत बुला लिया गया। मगर मंच में किसी कर्मी को नहीं भेजे जाने से उप तहसील का काम फिर भी शुरू नहीं हो सका। उप तहसील के करीब चार सप्ताह दरवाजे खुले रहने के दौर में भी नेटवर्क नहीं होने से ऑनलाइन प्रमाणपत्र नहीं बन सके। शेर सिंह, दान सिंह, भुवन जोशी, पुष्कर सिंह सहित यहां के ग्रामीणों का कहना है कि उप तहसील से लोगों को अपने गांवों के नजदीक सुविधा मिलने के बजाय करीब 33 किमी दूर चंपावत जाकर प्रमाणपत्र बनाने की फजीहत झेलनी पड़ रही है।
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कोट
मंच में मोबाइल नेटवर्किंग की भारी परेशानी की वजह से प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। नेटवर्किंग के लिए दूरसंचार विभाग को लिखा गया है। इसके अलावा कार्मिकों की कमी की वजह से यहां नायब तहसीलदार सहित अन्य कर्मी नहीं भेजे जा सके हैं। इसके चलते मंच उप तहसील से संबंधित सभी काम चंपावत तहसील से ही किया जा रहा है।
सीमा विश्वकर्मा,
उप जिला मजिस्ट्रेट,
चंपावत।
कोट
मंच सहित तल्लादेश क्षेत्र में अभी भारत संचार निगम लिमिटेड की टू-जी सेवा है। इस कारण इंटरनेट की गति कम है। जिला मुख्यालय के बाद तहसील मुख्यालयों में थ्री-जी सेवा पर काम चल रहा है। फिलहाल मंच में थ्री-जी का प्रस्ताव नहीं है।
मनीष पंत,
उप खंड अभियंता,
बीएसएनल, लोहाघाट।

ब्राडबैंड से नहीं जुड़ सका एक भी ब्लाक
केंद्र सरकार ने देश की सभी 2.50 लाख ग्राम पंचायत भवनों को 2019 तक ब्राडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। योजना के तहत दो वर्ष पूर्व चंपावत जिले के चार विकासखंडों में से एक लोहाघाट ब्लाक को चयनित किया गया था। लोहाघाट विकासखंड के 67 ग्राम पंचायत भवनों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ब्राडबैंड से जोड़ने का काम चल रहा है। मगर अभी तक ये काम पूरा नहीं हो सका है।
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