लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट क्षेत्र के वन पंचायत चमरौली में अवैध रूप से काटे गए पेड़ों में प्रथम दृष्ट्या वन पंचायत और ग्राम पंचायत की भूमिका संदेह के घेरे में है। प्रशासन और वन विभाग के संयुक्त निरीक्षण के बाद तहसीलदार नीलू चावला द्वारा एसडीएम, डीएफओ और वन विभाग के एसडीओ को भेजी गई जांच रिपोर्ट में ये अंदेशा जताया गया है।
पेड़ों के कटे होने का मामला आठ अक्तूबर को उजागर हुआ था। तहसीलदार का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए बड़ी संख्या में अवैध रूप से दुर्लभ प्रजाति बांज के पेड़ों को काट कर ठिकाने लगाया गया। सबूत मिटाने की मंशा से काटे पेड़ों की जड़ों में आग लगाने के साथ उसकी सारी लकड़ियां भी गायब कर दी गई। इतना कुछ होने के बावजूद भी ग्राम प्रधान और सरपंच द्वारा वन विभाग और प्रशासन को इसकी सूचना न देना उनकी भूमिका को संदेह के दायरे में लाता है।
तहसीलदार के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक केएस धौनी, उप निरीक्षक पवन जुकरिया, राजेंद्र नाथ के साथ वनबीट अधिकारी उत्तम नाथ ने बुधवार को मौका मुआयना कर पेड़ों के कटे होने की पुष्टि की थी। उनकी रिपोर्ट में करीब 45 से 55 तक पेड़ कटे होने की बात कही गई है। जबकि वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी का कहना है कि 120 से अधिक छोटे-बड़े पेड़ अवैध रूप से काटे गए हैं।
रेंजर का कहना है कि शुक्रवार को प्रशासन की टीम को साथ लेकर एक बार फिर वन पंचायत का स्थलीय निरीक्षण कर काटे गए पेड़ों की संख्या की गिनती करने के साथ उनकी गोलाई को भी नापा जाएगा।
इधर ग्राम प्रधान उमेद सिंह और सरपंच अमर सिंह ने पेड़ों के कटान में किसी तरह की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष भूमिका से साफ इंकार किया है। दावा किया है कि उन्हें पेड़ों के कटने की जानकारी नहीं थी।