गर्भवती ने सड़क में जन्मा शिशु
टैक्सी से टनकपुर अस्पताल ले जा रहे थे, टिप्पन टॉप के मंदिर के पास हुआ जन्म
चंपावत। तल्लापाल क्षेत्र के बुड़म गांव की एक गर्भवती महिला ने रास्ते में ही एक शिशु को जन्म दिया। इस महिला को प्रसव के लिए टनकपुर अस्पताल ले जाया जा रहा था। शिशु जन्म के बाद गर्भवती महिला को वापस गांव ले जाया गया।
जानकारी के मुताबिक पहली मार्च को मुख्यालय से करीब 51 किलोमीटर दूर सूखीढांग से एक गर्भवती महिला कलावती देवी (29) पत्नी नारायण निवासी बुड़म गांव को एक जीप से टनकपुर अस्पताल को ले जाया जा रहा था। सूखीढांग से तकरीबन आठ किलोमीटर दूर टिप्पन टॉप के माता पूर्णागिरि मंदिर के पास महिला लघुशंका के लिए उतरी, तो वहीं उन्होंने शिशु को जन्म दे दिया। इसी दौरान टनकपुर को जा रहे भाजपा परिवहन प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नारायण सिंह गैड़ा और कुछ अन्य महिलाओं ने महिला की मदद की। महिला व शिशु दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। इसके बाद महिला को अस्पताल के बजाय वापस गांव ले जाया गया।
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रास्ते में शिशु को जन्म देने वाली महिला को अस्पताल छुट्टी मिली
आर्थिक सहायता को पत्र लिखेंगे परिजन, आपात चिकित्सा सेवा 108 तक नहीं मिल सकी थी
चंपावत। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर मौनपोखरी गांव की महिला को शिशु जन्म के बाद पिथौरागढ़ महिला अस्पताल से शनिवार को छुट्टी मिल गई। जच्चा-बच्चा दोनों की हालत में सुधार होने के बाद अस्पताल ने महिला को छुट्टी दे दी है।
उल्लेखनीय है कि मौनपोखरी की रेखा देवी (30) पत्नी कैलाश राम को पहली मार्च की तड़के एक बजे दर्द उठा था।
तीन किलोमीटर पैदल डोली पर लाने और इसके बाद सड़क मार्ग से आपात चिकित्सा सेवा 108 के जरिए जिला अस्पताल लाया गया था। गर्भवती के परिजनों ने आरोप लगाया था कि दर्द से कराह रही गर्भवती को समय पर इलाज नहीं मिल सका। और तो और अस्पताल की ओर से कुछ कर्मियों ने महिला को पास के ही एक निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दे डाली। बाद में गर्भवती को 108 सेवा नहीं मिलने पर निजी वाहन से पिथौरागढ़ महिला अस्पताल ले जाया गया, मगर रास्ते में घाट के पास रेखा देवी ने शिशु को जन्म दिया।
मां और नवजात को हालत के मद्देनजर दो दिन तक अस्पताल में रखा गया। शनिवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी। रेखा के देवर सुनील का कहना है कि पिथौरागढ़ अस्पताल ले जाने के लिए आपात चिकित्सा सेवा 108 भी नहीं मिली। आनन-फानन में निजी वाहन की व्यवस्था की, जिसमें तीन हजार रुपये खर्च हुए। परिजनों का कहना है कि सोमवार को वे इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में पत्र भेजकर जननी सुरक्षा योजना के लाभ सहित अन्य आर्थिक सहायता के लिए आग्रह करेंगे।
कोट
जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत गर्भवती महिला को उच्च केंद्र पहुंचाने के लिए आपात चिकित्सा सेवा 108, शिशु जन्म के बाद घर पहुंचाने के लिए खुशियों की सवारी उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही आशा कार्यकर्त्ता के जरिए अस्पताल में लाए जाने पर ग्रामीण क्षेत्र की महिला को 1400 रुपये दिए जाते हैं।
डॉ.रश्मि पंत, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, चंपावत।