अमर उजाला फाउंडेशन, मृत्युंजय मिशन और आरोग्यम फाउंडेशन की ओर से आयोजित तीन दिनी मर्म चिकित्सा शिविर का सोमवार को समापन हो गया। तीन दिनों में आठ सौ से ज्यादा मरीजों ने शिविर में उपचार करवाया। सोमवार को 235 मरीजों की मर्म चिकित्सा हुई। शिविर में अंगों और जोड़ों के दर्द के की शिकायत के मरीजों की संख्या ज्यादा रही। मर्म चिकित्सा से मिली राहत के बाद मरीजों ने तीनों संस्थानों का आभार जताया और ऐसे शिविर भविष्य में भी लगाने का आग्रह किया।
चंपावत जिला प्रशासन विशेषकर डीएम डॉ. अहमद इकाबल के विशेष सहयोग से संयुक्त चिकित्सालय में आयोजित शिविर के तीसरे दिन भी मरीजों की काफी भीड़ रही। अंतरराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त मर्म चिकित्सक प्रो. डॉ. सुनील जोशी के नेेतृत्व में चले शिविर में विशेषज्ञों ने मरीजों और तीमारदारों को मर्म बिंदु भी बताए, ताकि मरीज खुद या तीमारदार मर्म बिंदुओं को उत्प्रेरित कर उपचार कर सकें।
उन्होंने कहा कि मर्म चिकित्सा में सावधानी जरूरी है। गलत बिंदुओं पर मर्म करने से इसके दुष्परिणाम भी देखने को मिले हैं। शिविर में स्थानीय क्षेत्रों के मरीजों के अलावा लोहाघाट, चंपावत, पिथौरागढ़, बनबसा, चकरपुर, खटीमा, झनकट, मझोला, नानकमत्ता से भी मरीज उपचार कराने पहुंचे थे।
शिविर के सफल आयोजन में लायंस क्लब, राजकीय महाविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवियों के अलावा राजीव आर्य, डॉ. जेबी चंद, भुवन चंद्र जोशी, रवि कुमार प्रजापति, नायकगोठ के समाजसेवी महेश सिंह आदि ने सहयोग दिया।
इन विशेषज्ञों ने दी मायूस चेहरों को खुशी
असाध्य रोगों और शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द से जूझ रहे लोगों के चेहरों पर मर्म चिकित्सा से खुशी देने वाले चिकित्सकों की टीम में अंतरराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त प्रो. डॉ. सुनील कुमार जोशी, मर्म चिकित्सक डॉ. जगदीश सती, डॉ. आशुतोष पंत, डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. एम साहिद, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. लता मेलकानी, डॉ. रेनू जोशी के अलावा केएन दीक्षित, ललित कुमार, नमिता पंत, सुमन करगेती, मयंक जोशी, ज्ञानप्रकाश, धीरज पाठक, दिनेश पंत, रंजना प्रकाश शामिल रहे।
तीन दिन मर्म चिकित्सा से हुआ 75 प्रतिशत फायदा
चार साल से चल न पाने और हाथ ऊपर उठाने में असमर्थ ऊधम सिंह नगर जिले के मझोला निवासी सरदार प्यारा सिंह (57) को शिविर में तीन दिन मर्म चिकित्सा कराने से 75 प्रतिशत फायदा मिला है। प्यारा सिंह का कहना है कि उसने शिविर के तीनों दिन मर्म चिकित्सा कराई, जिससे वह काफी हद तक चल पाने में समर्थ हो गया है और हाथ ऊपर उठाने में भी कोई परेशानी नहीं हो रही है।
मर्म चिकित्सा से तुरंत दूर हुआ हाथ-पैरों का दर्द : हीरा
सोमवार को उपचार कराने आईं हीरा देवी (64) को मर्म चिकित्सा से हाथ-पैरों के दर्द में आराम मिला। हीरा देवी ने बताया कि वह दो साल से हाथ-पैरों के दर्द से परेशान हैं। चलने में दर्द होता है और हाथ भी ऊपर नहीं उठा पाती हैं, लेकिन मर्म चिकित्सा कराने से काफी हद तक आराम मिला है।
रेखा को हाथ-पैरों में दर्द से मिली राहत
ककरालीगेट निवासी रेखा पंत (40) को भी मर्म चिकित्सा से पैरों और घुटनों के दर्द में राहत मिली है। रेखा ने बताया कि घुटनों में दर्द के कारण उसे बैठने-उठने में काफी परेशानी होती थी। सोमवार को मर्म चिकित्सा कराने के बाद उन्हें काफी आराम मिला है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों ने मर्म बिंदु बताए हैं। अब वह नियमित रूप से मर्म बिंदुओं को उत्प्रेरित करेंगी।
निराश मां की उम्मीद जगी
मर्म चिकित्सा से बसानीगोठ निवासी महेश (4) की मां मधु देवी की भी लाड़ले के ठीक होने की उम्मीद जगी है। मधु ने बताया कि बेटे महेश के हाथ-पैर जन्म से ही काम नहीं करते हैं, लेकिन मर्म चिकित्सा कराने के बाद अब वह धीरे-धीरे चल रहा है।
अन्य से अलग है मर्म चिकित्सा पद्धति : डॉ. जोशी
डॉ. सुनील जोशी ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में समय के साथ बदलाव होता रहता है, लेकिन मर्म चिकित्सा आदिकाल से एक ही पद्धति पर कायम है। आधुनिक चिकित्सा में न सिर्फ उपचार के तरीके अलग हैं बल्कि अलग-अलग मर्ज की दवाइयां भी अलग होती हैं।
उन्होंने दर्द निवारक दवाओं को खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि मर्म चिकित्सा में सिर्फ शरीर के मर्म बिंदुओं को दबाकर उत्प्रेरित करने से ही बीमारी दूर हो जाती है। डॉ. जोशी ने कहा कि मर्म चिकित्सा के जरिये एक दिन में कई मरीजों का उपचार संभव है और ज्यादातर बीमारियां दस से पंद्रह मिनट की मर्म चिकित्सा से दूर हो जाती हैं।