उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है। प्रशासनिक आंकड़े के अनुसार इस बार मेले के 83 दिनों में करीब 22 लाख भक्त मां के दर्शन को पहुंचे। हालांकि, बरेली रूट पर ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा, इसके बावजूद देवी भक्तों की भीड़ कम नहीं रही। पिछले साल भी श्रद्धालुओं का आंकड़ा लगभग इसी साल के बराबर रहा।
हर साल होली के अगले दिन से शुरू होने वाला पूर्णागिरि मेला इस बार 25 मार्च से शुरू हुआ और 83 दिन चला। मेला अवधि में ही हरिद्वार कुंभ मेला होने से इस बार बाहरी जिलों से फोर्स मिलना तो दूर जिले का आधा फोर्स भी कुंभ ड्यूटी में लगा रहा। मेले की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी जिले के आधे फोर्स के कंधों पर ही टिकी रही। मेला मजिस्ट्रेट एसडीएम नरेश दुर्गापाल के मुताबिक मेला अवधि में करीब 22 लाख भक्तों ने मां पूर्णागिरि के दरबार में मत्था टेका।
उन्होंने बताया कि यह आंकड़ा गैंड़ाखाली में एसएसबी द्वारा की जाने वाली वाहनों की गिनती और पुलिस द्वारा काली मंदिर द्वार पर की जाने वाली गिनती से श्रद्धालुओं की संख्या का आकलन किया गया है।
किसी को नहीं पता, कितना चढ़ावा आया
मां पूर्णागिरि धाम के प्रति लाखों लोगों की आस्था और हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन को पहुंचते हैं, लेकिन धाम में किए जाने वाला चढ़ावा पुजारियों की झोली में जाता है। ऐसे में चढ़ावे के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं रहती है। बता दें कि धाम के पुजारियों की आजीविका धाम के आने वाले चढ़ावे पर ही निर्भर है। सभी परिवारों को चढ़ावे का लाभ मिले, इसके लिए पुजारियों द्वारा लॉटरी सिस्टम से हर परिवार की बारी तय की जाती है। 24 घंटे की इस बारी में जो भी चढ़ावा आता है उस पर बारी वाले पुजारी का हक होता है। धाम में कितना चढ़ावा आता है इस बारे में किसी के पास कोई अधिकृत जानकारी नहीं होती है।
बायामैट्रिक सिस्टम में सिर्फ ढाई लाख श्रद्धालु दर्ज
पूर्णागिरि मेले के 83 दिनों में 22 लाख श्रद्धालुओं के आने का प्रशासन दावा कर रहा है, लेकिन श्रद्धालुओं की गिनती के लिए भैरव मंदिर में लगाए गए बायोमैट्रिक पंजीकरण सिस्टम में सिर्फ ढाई लाख श्रद्धालुओं का ही पंजीकरण दर्ज हो पाया है। एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि बायोमैट्रिक पंजीकरण का यह पहला प्रयास था, अगले वर्ष से इसे और असरकारक तरीके से लगाया जाएगा, ताकि देवी के दर्शन को आने वाले यात्रियों की संख्या का सही आंकड़ा पता चल सके।