चंपावत। 27 जुलाई को हरखेड़ा गांव की गर्भवती जानकी देवी को जिला अस्पताल से पिथौरागढ़ महिला अस्पताल रेफर किया गया लेकिन उन्हें 108 सेवा नहीं मिल सकी। महिला की गंभीर हालत देखते हुए सीएमएस डॉ. आरके जोशी ने उन्हें खुशियों की सवारी (केकेएस) से पिथौरागढ़ भिजवाया। कहने को तो 108 आपात सेवा है मगर जिले में खुशियों की सवारी आपात सेवा बनी हुई है।
जिले में चंपावत, लोहाघाट, पाटी, रीठा साहिब, टनकपुर सहित कुल पांच 108 संचालित है। इन सेवाओं के जरिए औसतन हर माह 222 मरीजों को अस्पताल तक ले जाया जाता है। काफी समय से इन सभी वाहनों के पहिए घिस गए हैं। टायर की मांग के बावजूद नए टायर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं जिससे अब यह केवल 15 किमी दायरे में ही सेवा दे पा रही हैं। 108 के स्थान पर गर्भवती महिलाओं के लिए उपयोग में लाए जाने वाली जिले की तीन केकेएस (104 सेवा) से मरीजों को लाया-लेजाया जा रहा है। प्रशासन के इस उदासीन रवैये से लोगों में रोष है।
जिले की सभी पांचों 108 सेवाएं संचालित हैं। मगर ये सेवाएं टायरों की कमी से लंबी दूरी तय नहीं कर पा रही है। टायरों की तीन बार मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक उपलब्ध नहीं हो सके हैं।
- रजत उनियाल, जिला समन्वयक, आपात सेवा 108